Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बलरामपुर कलेक्टोरेट में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत रहे कर्मचारी कलेंद्र राम को राहत देने से इंकार कर दिया है। कर्मचारी ने चार वर्ष तक सेवा देने के बाद अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने कलेक्टर और सिंगल बेंच के फैसले को सही मानते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी भर्ती में विज्ञापन में जितने पद घोषित किए जाते हैं, नियुक्ति केवल उन्हीं पदों पर की जा सकती है। बाद में स्वीकृत अतिरिक्त पदों को पुरानी चयन सूची से भरना कानून और संविधान दोनों के विपरीत है।
पढ़िए क्या है पूरा मामला?
बलरामपुर कलेक्टर कार्यालय ने 4 अप्रैल 2012 को चपरासी और सहायक ग्रेड-3 सहित कुल 340 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद विज्ञापित सभी पद भर दिए गए। इसके बाद शासन ने कुछ अतिरिक्त पद स्वीकृत किए। प्रशासन ने नए पदों के लिए अलग से विज्ञापन जारी करने के बजाय पुरानी चयन सूची और प्रतीक्षा सूची से उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी। इसी प्रक्रिया के तहत कलेंद्र राम को सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर कलेक्टर ने वर्ष 2015 में इन अतिरिक्त नियुक्तियों को निरस्त कर दिया।
कर्मचारी ने हाई कोर्ट में दी चुनौती
सेवा समाप्ति के आदेश के खिलाफ कलेंद्र राम ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्ति प्राप्त की थी और चार वर्ष से अधिक समय तक सेवा भी दी है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई थी तो उसके लिए कर्मचारी जिम्मेदार नहीं हो सकता। नियोक्ता की गलती का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए।
राज्य सरकार ने रखा यह पक्ष
राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विज्ञापन में घोषित पद भर जाने के बाद चयन सूची का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। बाद में सृजित या स्वीकृत पदों को भरने के लिए नई भर्ती प्रक्रिया और नया विज्ञापन अनिवार्य है। सरकार ने कहा कि पुरानी चयन सूची से अतिरिक्त पद भरने से उन उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं, जिन्हें नई भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने का अवसर मिलना चाहिए था।
हाई कोर्ट ने क्यों माना बर्खास्तगी को सही?
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने पाया कि कलेंद्र राम की नियुक्ति मूल विज्ञापन में शामिल रिक्त पदों के विरुद्ध नहीं हुई थी, बल्कि बाद में स्वीकृत अतिरिक्त पद पर पुरानी चयन सूची के आधार पर की गई थी। डिवीजन बेंच ने कहा कि एक बार विज्ञापन में उल्लेखित सभी पद भर जाने के बाद चयन प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाती है। भविष्य की रिक्तियों या अतिरिक्त पदों को पुरानी सूची से भरना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन है।
चार साल की सेवा भी नहीं बचा सकी नौकरी
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी द्वारा लंबे समय तक सेवा देने मात्र से अवैध नियुक्ति वैध नहीं हो जाती। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। यदि नियुक्ति ही नियमों के विपरीत हुई है, तो केवल सेवा अवधि के आधार पर उसे संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
डिवीजन बेंच ने खारिज की अपील
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा नियुक्ति निरस्त करने के आदेश और सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया। डिवीजन बेंच ने कहा कि अतिरिक्त पदों पर पुरानी चयन सूची से की गई नियुक्तियां कानूनन टिकाऊ नहीं हैं। इसी आधार पर कर्मचारी की अपील खारिज कर दी गई।