Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि विभाग पदोन्नति की प्रक्रिया जारी रख सकता है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने यह आदेश वरिष्ठता सूची को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
वरिष्ठता सूची को लेकर उठा विवाद
याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार देशमुख ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा स्वेच्छा से दूसरे जिलों में स्थानांतरण लेकर पहुंचे आरक्षकों की वरिष्ठता तय करने में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमों के अनुसार ऐसे आरक्षकों को नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाना चाहिए, लेकिन विभाग उनकी मूल नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता का लाभ देकर पदोन्नति पर विचार कर रहा है।
राज्य सरकार ने मांगा जवाब दाखिल करने का समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने अदालत से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। उन्होंने कहा कि याचिका में पुलिस मुख्यालय के स्पष्टीकरण पत्र को सीधे चुनौती नहीं दी गई है और मामले पर विस्तृत पक्ष रखना आवश्यक है।
हाई कोर्ट ने दिया अंतरिम निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल, आरक्षक (भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा की शर्तें) नियम, 2007 के प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी कर्मचारी का अंतिम प्रमोशन आदेश जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही सभी पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।