CG Teacher News: रायपुर। डीपीआई ने 19 मई को प्रदेशभर के जेडी को पत्र भेजकर अटैचमेंट के बारे में जानकारी मांगी है। डीपीआई ने अपने पत्र में विधानसभा सत्र के दौरान शून्यकाल में उठाए गए मामले और इस पर राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसले का हवाला देते हुए उसकी प्रति भी संलग्न की है। डीपीआई के पत्र को देखें तो स्कूल शिक्षा विभाग यह मानकर चल रहा है कि 5 जून 2025 से सभी तरह के संलग्नीकरण को खत्म कर दिया गया है। इसी सिलसिले में प्रदेशभर के जेडी से जानकारी तलब की गई है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ डीपीआई 5 जून 2025 से सभी प्रकार के अटैचमेंट बंद मान रहा है और दूसरी तरफ विभाग के भीतर ही वरिष्ठ अधिकारी यह खेल खेल रहे हैं। छह महीने बाद 1 दिसंबर 2025 को धमतरी के जिला शिक्षा अधिकारी ने राज्य सरकार के आदेश और विधानसभा में उठे मामले के बाद हुए फैसले को दरकिनार कर अद्भुत कारनामा कर दिखाया। दस्तावेजों पर नजर डालें तो अटैचमेंट का ऐसा गोरखधंधा शायद ही किसी और जिले में देखने को मिले। लेक्चरर से प्रिंसिपल पद पर पदोन्नत हुए शिक्षक पहले समग्र शिक्षा विभाग से कार्यमुक्त होते हैं, फिर प्रिंसिपल पद पर कार्यभार संभालते हैं और उसके बाद एक बार फिर खेल शुरू हो जाता है। प्रिंसिपल साहब का रसूख देखिए, जिस स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर जॉइनिंग दी, वहां महज कुछ घंटे बिताकर अटैचमेंट के रास्ते वापस समग्र शिक्षा विभाग पहुंच गए।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं। आखिर शिक्षक अपने मूल पद और पदस्थापना स्थल पर काम करने से क्यों कतराते हैं। इसी प्रिंसिपल का उदाहरण लें, समग्र शिक्षा विभाग और वहां की कुर्सी में ऐसा क्या आकर्षण है कि उसके लिए विभागीय व्यवस्था को ही ताक पर रख दिया जा रहा है।
पढ़िए किस तरह चल रहा है अटैचमेंट का यह खेल
अजय देशपांडे, जो वर्षों से समग्र शिक्षा में प्रतिनियुक्ति पर थे, उन्हें प्राचार्य पद पर पदस्थ किया गया। 27 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने प्राचार्य पद के लिए आदेश जारी किया। 28 नवंबर को अजय देशपांडे को समग्र शिक्षा से स्कूल के लिए कार्यमुक्त किया गया। 1 दिसंबर को उन्होंने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जोरातराई अ में प्राचार्य पद पर कार्यभार ग्रहण किया। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर उसी दिन यानी 1 दिसंबर को फिर से समग्र शिक्षा के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया। साफ मतलब यह है कि इन्होंने स्कूल में प्राचार्य के पद पर एक दिन भी सेवा नहीं दी।
अटैचमेंट के इस अजीबोगरीब खेल को लेकर अब शिक्षा विभाग के भीतर ही चर्चा होने लगी है। शिक्षकों के बीच यही बात घूम रही है कि जब खुद राज्य कार्यालय इस तरह का संलग्नीकरण का खेल खेलेगा, तो फिर यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि प्रदेश में शिक्षकों का अटैचमेंट बंद होगा।
अपने विभाग से बाहर शिक्षकों का ज्यादा झुकाव
प्रदेश के बीईओ, डीईओ कार्यालयों से लेकर जेडी कार्यालयों तक अटैचमेंट के जरिए शिक्षकों को आराम से कुर्सी पर बैठे देखा जा सकता है। अपने विभाग के अलावा शिक्षकों का रुझान राज्य सरकार के दूसरे विभागों में अधिक दिखाई देता है। पहुंच के दम पर जिला, जनपद से लेकर राजस्व, जिला निर्वाचन और कलेक्टोरेट कार्यालयों तक में शिक्षकों की मौजूदगी देखी जा सकती है।