CG Teacher Suspend: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में गुरुवार को एक बेहद दिलचस्प और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। नारायणपुर के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल द्वारा अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान राज्य शासन की ओर से उपस्थित अधिकारियों को मोबाइल पर एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें याचिकाकर्ता डीईओ के निलंबन का आदेश था। निलंबन आदेश सामने आते ही मामला अचानक नया मोड़ ले गया और याचिका की सुनवाई फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी।
क्या है पूरा मामला?
स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में जारी आदेश में नारायणपुर के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल को पद से हटाकर उनकी जगह महेंद्र नाथ पांडेय को नया जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए अशोक पटेल ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। गुरुवार को जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान ही स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से राज्य शासन के अधिवक्ता और विभागीय अधिकारी (OIC) को एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें अशोक पटेल के निलंबन का आदेश संलग्न था।
कोर्ट में पेश किया गया निलंबन आदेश
राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रहे एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट के समक्ष 18 जून 2026 को जारी स्कूल शिक्षा विभाग का निलंबन आदेश प्रस्तुत किया। सरकार ने कोर्ट को बताया कि अशोक पटेल को निलंबित कर उनका मुख्यालय लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर निर्धारित कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता के वकील ने मांगा समय
निलंबन आदेश की जानकारी मिलने के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शाल्विक तिवारी ने कोर्ट को बताया कि उन्हें इस आदेश के संबंध में कोई निर्देश या जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आदेश का अध्ययन करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए एक सप्ताह का समय प्रदान किया और अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी।
किस आरोप में किया गया निलंबित?
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार अशोक कुमार पटेल, तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी उत्तर बस्तर कांकेर, प्रधान पाठकों की पदोन्नति और पदस्थापना से जुड़े मामले में जांच में दोषी पाए गए हैं। जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि पदोन्नति के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया से तय पदस्थापना स्थलों में बिना काउंसलिंग किए संशोधन किया गया, जिसके लिए तत्कालीन डीईओ को जिम्मेदार माना गया है।
निलंबन आदेश में क्या कहा गया?
विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार अशोक कुमार पटेल द्वारा शासन के निर्देशों के विपरीत कार्य करते हुए पदस्थापना आदेशों में संशोधन किया गया। इसे पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता माना गया है। आदेश में कहा गया है कि उनका कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
संयोग या रणनीतिक कदम?
सुनवाई के दौरान निलंबन आदेश का अचानक सामने आना अब शिक्षा विभाग और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि विभाग की ओर से इसे नियमित प्रशासनिक कार्रवाई बताया जा रहा है। अब सभी की नजरें हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां निलंबन आदेश और स्थानांतरण विवाद दोनों पहलुओं पर आगे की कानूनी बहस हो सकती है।