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आठ परिवार हुए साथ-साथ रहने राजी: फैमिली कोर्ट बेमेतरा में 28 मामलों का हुआ निपटारा

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बेमेतरा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए आज देशभर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया है। इसी कड़ी में बेमेतरा में नेशनल लोक अदालत का गठन किया गया। बेमेतरा परिवार न्यायालय में आयोजित नेशलन लोक अदालत दो बिछड़े परिवार और बच्चों के लिए राहत की खुशियां लेकर आई। परिवार न्यायालय की न्यायाधीश नीलिमा सिंह बघेल की समझाइश का असर ये हुआ कि दो बिछड़े परिवार साथ-साथ रहने के लिए राजी हो गए। आलम ये दोनों ही परिवार ने उनके ही अदालत में तलाक के लिए आवेदन पेश किया था। पति-पत्नी साथ पहुंचे और तलाक की अर्जी को वापस लेते हुए साथ रहने राजी हो गए। परिवार न्यायालय की न्यायाधीश और नेशनल लोक अदालत के दौरान उपस्थिति अधिवक्ताओं ने दोनों परिवार के उज्जवल भविष्य की कामना की और साथ-साथ जीवन बिताने की समझाइश भी दी।

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परिवार न्यायालय की न्यायाधीश नीलिमा सिंह बघेल ने बताया कि नेशनल लोक अदालत के दौरान आज परिवार न्यायालय में 28 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसमें सबसे अच्छी और खुशी की बात ये रही कि आठ परिवार एक साथ रहने के लिए राजी हुए। बिखरा परिवार एक बार फिर बस गया है। नेशनल लोक अदालत की खास बात ये कि सुनवाई के दौरान परिवार न्यायालय की न्यायधीश नीलिमा सिंह ने पति पत्नी को समझाते हुए साथ रहने की समझाइश दी। बच्चों की भविष्य की खातिर विवाद को खत्म करने और नए सिरे से जीवन बिताने की बात भी कही। न्यायाधीश की समझाइश काम आई और आठ बिखरे परिवार आज से एक बार फिर साथ आ गया।

मां से मांगी माफी, साथ रखने हुए तैयार
एक मामले में 63 वर्षीय सीनियर सिटीजन महिला ने अपने 31 वर्षीय तथा 27 वर्षीय दो पुत्रों के विरूद्ध परवरिश का मामला पेश किया था, जिसमें दोनों पुत्रों ने अपनी वृद्ध मां की परवरिश करना छोड़ दिया था। अपनी पत्नी के साथ मिलकर अपनी मां के साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया था। वह बेमेतरा थाना में शिकायत भी की थी। पुलिस थाना दाढ़ी के द्वारा पारिवारिक रिश्तेदारी का मामला मानते हुए कोई कार्यवाही नहीं की जा रही थी। जवान पुत्र के रहते उसके समक्ष भूखों मरने की स्थिति आ गई थी। परेशान आवेदिका विधवा असहाय 63 वर्षीय मां को परिवार न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। आज दोनों पुत्रों ने अपनी गलती की माफी मांग कर मामला समाप्त कराया।

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विवाह के 9 साल बाद हो गए थे अलग,अब बच्चों की खातिर रहेंगे साथ
एक मामले में विवाह के बाद पति-पत्नी 9 वर्ष तक साथ रहे। इस दौरान उनके चार संतान भी उत्पन्न हुए। दोनों ने पारिवारिक विवाद के चलते न्यायालय में आपसी सहमति से तलाक का प्रकरण पेश कर दिया था। दोनों को पारिवारिक एवं सामाजिक स्तर पर समझाइश भी दी गई, किन्तु कोई परिणाम नहीं निकला था। आज पति-पत्नी बचों के साथ न्यायालय में उपस्थित हुए और साथ रहने की बात कही।

एक साथ बाद फिर रहेंगे साथ-साथ
एक मामले में पति पत्नी का विवाह सन 2003 में हुआ था। लगभग 20 वर्ष साथ रहने के बाद बीते एक वर्ष से दोनों के बीच पारिवारिक विवाद के चले पत्नी अपने मायके में निवासरत थी। पति के विरूद्ध तलाक का मामला पेश कर दी थी। उक्त दोनों को आज परिवार न्यायाधीश द्वारा समझाइश देकर मामला समाप्त कराया।

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काउंसलिंग से बनी बात

परिवार न्यायालय की न्यायाधीश नीलिमा सिंह बताती हैं, पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद और फिर बात तलाक तक पहुंच जाती है। हमारी कोशिश रहती है कि परिवार ना टूटे। बचचों के भविष्य का वास्ता भी हम पति पत्नी को देते हैं। इसके बाद भी जब बात नहीं बनती तब लगातार काउसलिंग भी कराते हैं। इन मामलों में भी लगातार काउंसलिंग कराई गई। पति पत्नी के बीच सुलह का प्रयास किया गया। आखिरकार हमारी मेहनत रंग लाई। परिवार फिर साथ रहने के लिए राजी हो गए। नेशनल लोक अदालत की यह सबसे बड़ी सफलता है।


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