गुटीय लड़ाई ने किया कबाड़ा; मनभेद को लेकर राजधानी तक पहुंची बात

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बिलासपुर। तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के सकरी में सोमवार को विकास कार्यों के लोकार्पण व भूमिपूजन का कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम प्रारंभ होने के महज कुछ घंटे पहले इसे स्थगित कर दिया गया। भाजपा में यह पहली मर्तबे देखने को मिला है, जब पूरी तैयारी के बाद कार्यक्रम को ही स्थगित कर दिया गया। यह भी पहली बार हुआ जब इस तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम के पहले गुटीय राजनीति चरम पर नजर आई हो। अफसरों से चूक हुई या फिर जानबुझकर ऐसा किया गया। कारण चाहे जो भी हो। जिले की भाजपाई राजनीति में बीते दो साल के दौरान जो कुछ घटा और आगे जो घट रहा है, इसे अच्छे नजरिए से लोग नहीं देख रहे हैं। कार्यकर्ता तो हैरान हैं, साथ ही आम जनता भी हैरान और परेशान है। उनको यह बात समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों किसके इशारे पर सब कुछ हो रहा है।

राज्य की सत्ता में वापसी के बाद जिले की राजनीति समीकरण में तेजी के साथ बदलाव देखने को मिला। सत्ता के केेंद्र बिंदु ना केवल बदले,उसी अंदाज में गुटीय राजनीति भी हावी होने लगी। मिलजुलकर सरकार चलाने और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय व सामंजस्य का संदेश देने के बजाय पहले भीतर ही भीतर और अब सार्वजनिकतौर पर गुटीय राजनीति को हवा देने लगे हैं। सत्ताधारी दल के भीतर ही बदले की राजनीति के साथ ही अपमानजनक दृश्य भी उभरकर सामने आने लगे हैं। युवा महोत्सव के दौरान जो कुछ घटा उसे किसी भी नजरिए से अच्छा नहीं कहा जा सकता। पुलिस मैदान में आयोजित कुमार विश्वास के कार्यक्रम में जिस तरह बैठक व्यवस्था की गई थी उससे पूर्व मंत्री व भाजपा के कद्दावर नेता अमर अग्रवाल को अपमान का घुंट पीना पड़ा था।

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हालांकि मुख्यमंत्री ने बात संभाली और हस्तक्षेप कर अपने साथ बैठा लिए। सीएम ने उनके कद और गरिमा का ख्याल रखा। हालांकि सीएम ने फौरीतौर पर बात को तो संभाल लिया था, कार्यक्रम स्थल से बात निकली तो दूर तलक गई। अमर के साथ घटित घटना की चर्चा न्यायधानी से निकलकर राजधानी तक पहुंची। कार्यकर्ताओं से लेकर दिग्गज नेताओं के बीच यह चर्चा का विषय भी रहा। समर्थक कार्यकर्ता तो असहज होने के साथ अब लकीरें भी खींचने लगे हैं। जिले के कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले अमर अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व सांसद व विधायक पुन्नूलाल मोहले की सियासी हैसियत क्या है यह किसी से छिपी हुई नहीं है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में ये सभी हाशिए पर हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री हुए गुटीय राजनीति का शिकार

आमतौर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू की छवि सामंजस्य और मिलकर काम करने की है। सकरी के कार्यक्रम के लिए आमंत्रण पत्र में उनके नाम का जिक्र ही नहीं किया गया। अचरज की बात तो ये कि जिन विकास व निर्माण कार्यों का डिप्टी सीएम अरुण साव लोकार्पण व भूमिपूजन करने वाले थे अधिकांश कार्य केंद्रीय राज्य मंत्री के विभागों से संबंधित है। चर्चा तो इस बात की भी हो रही है, वरिष्ठ विधायकों के साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री को भी जिले की राजनीति में हाशिए पर डालने की कोशिश सत्ता के गलियारे से जुड़े लोगाें के द्वारा की जा रही है।

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जिले का हो रहा कबाड़ा

दिग्गजों के बीच आपसी खींचतान, मतभेद और मनभेद के चलते जिले का कबाड़ा हो रहा है। कार्यकर्ताओं तो परेशान हैं, अब आम जनता की भी परेशानी बढ़ने लगी है। सकरी का कार्यक्रम तय समय पर पूरा हो जाता तो जिन कार्यों का भूमिपूजन हुआ रहता, उसकी फाइलें विभाग में चलनी शुरू हो जाती। तय समय पर टेंडर व जरुरी प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाता। पर यह सब अब अटक गया है। दिग्गजों के बीच गुटीय संघर्ष की खाई कम होने के बजाय गहरी होती जा रही है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।


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