मुख्य सूचना आयुक्त व आयुक्त के मामले में दायर याचिका पर बिलासपुर हाई कोर्ट को चार सप्ताह के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।
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दिल्ली। छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त व आयुक्त की चयन प्रक्रिया अदालती झंझटों में फंसा हुआ है। याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय सूचना आयोग में नियुक्तियों के छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त व आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में जारी चयन प्रक्रिया पर हाई कोर्ट की राेक लगी हुई है।संबंध में दायर याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। इस पर डिवीजन बेंच ने बिलासपुर हाई कोर्ट को चार सप्ताह के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है। डिवीजन बेंच ने बिलासपुर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देशित किया है कि कोर्ट के निर्देशानुसार अनुपालन रिपोर्ट भेजेंगे।

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केंद्रीय सूचना आयोग में नियुक्तियों को लेकर याचिका दायर की गई थी। दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण व पक्षकार की ओर से अधिवक्ता केएम नटराज व अधिवक्ताओं ने पैरवी की। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की पैरवी के दौरान तर्कों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा कि हमने अधिवक्ताओं तथा भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को सुना है। समिति केन्द्रीय सूचना आयोग के संबंध में, हमें सूचित किया गया है कि खोज समिति ने अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है और चयन समिति में शामिल प्रधानमंत्री (समिति के अध्यक्ष); लोकसभा में विपक्ष के नेता; और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री, तीन सप्ताह की अवधि के भीतर पेश किए गए आवेदनों पर विचार करेंगे। डिवीजन बेंच ने कहा कि हमारे पास इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि भारत संघ अंजलि भारद्वाज मामले में इस न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों, दिशानिर्देशों का पालन करेगा और चयन प्रक्रिया को यथाशीघ्र अंतिम रूप देगा।

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मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक सरकार को नोटिस

याचिका की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि अभिलेखों से हमें यह भी पता चलता है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर रिक्तियां भरी नहीं गई हैं। इसलिए इन राज्यों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस संबंध में कार्रवाई शुरू करें। तीन सप्ताह की अवधि के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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इन राज्यों में पेंडेंसी अधिक, अतिरिक्त पद सृजित करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु, ओडिशा, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को सूचना अधिनियम के अंतर्गत अपीलों, शिकायतों की बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों को देखते हुए और अधिक पदों की स्वीकृति देनी पड़ सकती है। ये राज्य सरकारें इस संबंध में उचित निर्णय लें और न्यायालय को अवगत कराएं। डिवीजन बेंच ने कहा कि इन सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाता है कि वे नवीनतम स्वीकृत पदों, भरे गए पदों और चयन प्रक्रिया, यदि कोई हो, के चरण के संबंध में अपनी-अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें।

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झारखंड के चीफ सिकरेट्री को कड़ा नोटिस, कार्रवाई की दी चेतावनी

डिवीजन बेंच ने झारखंड के चीफ सिकरेट्री को नोटिस जारी करते हुए कहा कि झारखंड राज्य के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि लंबित चयन प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर सभी तरह से पूरी हो जाए और अनुपालन हलफनामा दायर किया जाए, ऐसा न करने पर यह न्यायालय उचित कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा। याचिका की अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 की तिथि तय कर दी है।


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