निगम का चला बुलडोजर: जमींदोज हुआ हॉस्पिटल और मकान
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बिलासपुर | मिशन हॉस्पिटल कैंपस के 12 एकड़ जमीन की लीज निरस्त होने के मामले में सिंगल बेंच से याचिका खारिज होने के बाद क्रिश्चियन विमेंस बोर्ड ऑफ मिशन ने डिवीजन बेंच में याचिका दाखिल की थी। डिवीजन बेंच से भी याचिका खारिज होने के बाद दूसरे ही दिन मिशन हॉस्पिटल कैंपस में बने मकानों पर जिला और निगम प्रशासन ने बुलडोजर चलाया है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के दूसरे ही दिन नगर निगम ने मिशन हॉस्पिटल कैंपस में बड़ी कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी। सुबह 5 बजे से शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक चली।

निगम ने लाउडस्पीकर से चेतावनी देते हुए कैंपस में रह रहे 35 परिवारों को मकान खाली करने कहा। इसके बाद 7 जेसीबी, 9 काउंकेचर, 29 ट्रैक्टर और 11 डंपरों की मदद से करीब 17 आवासीय भवनों को ढहा दिया गया। कार्यवाही के दौरान निगम आयुक्त, 7 जोन कमिश्नर, इंजीनियरों और अतिक्रमण शाखा के करीब 150 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान कई लोगों ने विरोध भी किया, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया।

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क्रिश्चियन बोर्ड ने दायर की थी याचिका

मिशन हॉस्पिटल कैंपस की तकरीबन 12 एकड़ की जमीन की लीज नवीनीकरण नहीं होने और व्यवसायिक उपयोग को लेकर तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने संज्ञान लिया था। नजूल विभाग ने उक्त जमीन की लीज जारी की थी,जिसे वापस नजूल के खाते में दर्ज कर लिया गया था। यहां निगम प्रशासन नालंदा समेत अन्य जनोपयोगी चीज बनाने को लेकर कार्ययोजना तैयार कर रहा था। पर इसे रोकने और लीज नवीनीकरण को लेकर क्रिश्चियन वीमेंस बोर्ड ऑफ मिशन के डायरेक्टर नितिन लॉरेंस और उनके सहयोगियों ने हाईकोर्ट के सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी। लीज न बढ़ाने के प्रशासनिक फैसले को उन्होंने चुनौती दी थी, परंतु हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज कर दी।

27 साल तक नहीं की लीज रिन्युअल की मांग

हाईकोर्ट ने सुनवाई में कहा कि न केवल रिन्युअल की मांग 27 साल तक नहीं की गई, बल्कि इस दौरान लगातार शर्तें तोड़ी गईं। नोटिस को भी किसी अन्य फोरम में चुनौती नहीं दी गई। ऐसे में न तो इनके पास कोई वैध टाइटल है, न ही ओरिजिनल अलॉटी का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार। मिशन हॉस्पिटल मामले में सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने डिवीजन बेंच में अपील की थी। उन्होंने तर्क दिया कि चांटापारा स्थित प्लॉट नंबर 20 और 21 उन्हें 1959 की भूमि राजस्व संहिता की धारा 158(3) के तहत आवंटित किए गए थे और वे 1882 से धार्मिक, शैक्षिक व धर्मार्थ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अस्पताल, नर्सिंग स्कूल और चैपल का विवरण देते हुए सरकार पर बेदखली की कोशिश का आरोप लगाया।

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परंतु हाईकोर्ट ने सभी तर्कों को खारिज करते हुए प्रशासनिक निर्णय को सही ठहराया और अपील को निरस्त कर दिया। कार्रवाई स्थल पर चर्चा रही कि जब मिशन अस्पताल के हर एक घर को गिराया गया, तो अपने आप को जमीन मालिक बताने वाले नितिन लॉरेंस, जयदीप रॉबिनसन, बिशप सुषमा सिंह या फिर सीएनआई चर्च से जुड़े किसी व्यक्ति ने न तो लोगों के टूटे घरों का सामान उठाने में कोई मदद की, और न ही किसी पीड़ित परिवार के प्रति ज़रा-सी भी संवेदना दिखाई।

सुबह उठते ही निगम का बजा भोंपू बजा, खाली करो मकान

हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने बिना देरी किए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। मंगलवार को सुबह से ही निगम का दस्ता वहां पहुंच गया। लोग सोकर अभी उठे भी नहीं थे कि सीधे निगम अफसरों के माइक से आवाजें निकलने लगीं कि घर खाली करो, तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू हो रही है। ऐसे में परिसर के अंदर रहने वाले 35 परिवारों में हड़कंप मच गया। जमकर विवाद भी हुआ, लेकिन निगम के कर्मचारियों ने उनके घरों से सामान निकालकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी। मिशन हॉस्पिटल परिसर में वर्षों से रह रहे परिवारों को बेघर होना पड़ा।

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