कर्मचारियों के लिए खास खबर: रिटायरमेंट से एक साल पहले अधिक वेतन देने के नाम पर नहीं कर सकते वसूली

Share on

बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट का यह आदेश शासकीय अधिकारी व कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा, किसी भी शासकीय अधिकारी,कर्मचारी के सेवा निवृत्त होने के एक वर्ष पूर्व उन्हें अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर उनके वेतन से वसूली नहीं की जा सकती। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता रिटायर डीएसपी से की गई अतिरिक्त वसूली को उनके बैंक अकाउंट में वापस जमा कराने का आदेश राज्य शासन को दिया है। याचिकाकर्ता रिटायर डीएसपी एसएस टेकाम ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।

हाई कोर्ट ने रिटायर डीएसपी की याचिका पर सुनवाई के बाद अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच द्वारा पारित न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के विरूद्ध जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को याचिकाकर्ता से वसूल की गई संपूर्ण राशि उनके बैंक खाते में वापस जमा करने का निर्देश दिया है।

Also Read – शराब के नशे में आता था स्कूल, गुटखा खाने का भी है शौकीन, डीईओ ने किया निलंबित

छत्तीसगढ़ बिलासपुर निवासी डीएसपी एसएस टेकाम पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर में पदस्थ थी। पदस्थापना के दौरान पुलिस अधीक्षक बिलासपुर ने याचिकाकर्ता टेकाम के विरुद्ध रिकवरी आदेश जारी कर दिया। सेवाकाल के दौरान वेतन निर्धारण में त्रुटि के अधिक अधिक वेतन भुगतान को कारण बताया। अंतर की राशि की वसूली के लिए नोटिस जारी करने के साथ ही कटौती भी शुरू कर दी। पुलिस अधीक्षक के रिकवरी आदेश को चुनौती देते हुए डीएसपी टेकाम ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कहा कि याचिकाकर्ता को अधिक वेतन भुगतान को लेकर जारी वसूली आदेश तकरीबन पांच साल पहले का है। अधिवक्ता पांडेय ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता डीएसपी को पुलिस अधीक्षक द्वारा वसूली आदेश रिटायरमेंट तिथि से छह माह पहले जारी किया गया था जो कि पूर्णतः नियम विरूद्ध है।

अधिवक्ता पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत का दिया हवाला

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट ऑफ पंजाब एवं अन्य विरूद्ध रफीक मसीह (व्हाईट वासर), थॉमस डेनियल विरूद्ध स्टेट ऑफ केरला, भगवान शुक्ला विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में पारित न्याय दृष्टांत के अलावा बिलासपुर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच द्वारा स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ एवं अन्य विरूद्ध लाभाराम ध्रुव में पारित न्यायदृष्टांत का हवाला दिया। इन मामलों में दिए गए फैसले की जानकारी दी और बताया कि सुप्रीम कोर्ट और बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है, किसी भी शासकीय अधिकारी, कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के एक वर्ष पूर्व उन्हें अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर उनके वेतन से वसूली नहीं की जा सकती है। यदि अधिक वेतन भुगतान वसूली आदेश जारी किये जाने के पांच वर्ष पूर्व का है, तो भी ऐसी स्थिति में भी अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर शासकीय अधिकारी, कर्मचारी के वेतन से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती।

Also Read – काम के बहाने महिला से हेड मास्टर करने लगा छेड़छाड़, पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल

वसूली गई राशि याचिकाकर्ता के बैंक अकाउंट में जमा करने निर्देश

रिट याचिका की सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच द्वारा पारित न्याय दृष्टांतों के आधार पर याचिकाकर्ता के विरूद्ध जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को याचिकाकर्ता से वसूल की गई संपूर्ण राशि उनके बैंक खाते में वापस जमा करने का निर्देश दिया है।


Share on
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!