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CG High Court News News: स्कूल शिक्षा विभाग में 10 साल से काम कर रहे दो संविदा कर्मचारियों को नियमित करने हाई कोर्ट ने राज्य शासन को जारी किया निर्देश

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CG High Court News News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने 10 वर्षों से अधिक समय से डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में सेवाएं दे रहे दो संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि एक आदर्श नियोक्ता के रूप में राज्य का दायित्व है कि वह अपने कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण और समान व्यवहार करे, चाहे वे संविदा पर हों या नियमित।

10 साल से अधिक सेवा, फिर भी नहीं मिला नियमित दर्जा

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हंस कुमार रजवाड़े और जय प्रकाश चौहान ने वर्ष 2022 में जारी राज्य शासन के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी नियुक्ति को नियमित मानने से इनकार करते हुए उन्हें संविदा कर्मी बताया गया था। दोनों याचिकाकर्ता वर्ष 2012-13 से डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं और स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध लगातार सेवा दे रहे थे। याचिका में कहा गया कि नियुक्ति आदेश में दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि का उल्लेख था, जो सामान्यतः नियमित नियुक्ति में ही लागू होती है। इसके बावजूद उन्हें संविदा कर्मचारी मानकर नियमितीकरण से वंचित रखा गया।

क्या था पूरा विवाद

राज्य शासन ने वर्ष 2012 में संयुक्त विज्ञापन जारी कर विभिन्न तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद नियमित स्वीकृत पद थे और उस समय नियमित भर्ती पर लगा प्रतिबंध भी हट चुका था। इसके बावजूद विज्ञापन में पदों को संविदात्मक बताया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने विधिवत चयन प्रक्रिया में भाग लिया, नियुक्ति आदेश में परिवीक्षा अवधि का उल्लेख था और उन्होंने 10 वर्षों से अधिक समय तक बिना किसी व्यवधान के कार्य किया। इसके बाद भी उनकी सेवाओं को संविदा मानना मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन है।

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राज्य सरकार का पक्ष

राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का कोई स्पष्ट नीति या परिपत्र उपलब्ध नहीं है। केवल लंबी सेवा अवधि के आधार पर नियमितीकरण नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सार्वजनिक रोजगार की संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत होगा।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस ए.के. प्रसाद ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विधिवत स्वीकृत पदों पर हुई थी और नियुक्ति आदेश में परिवीक्षा अवधि का उल्लेख इस बात का संकेत है कि नियुक्ति का स्वरूप नियमित प्रकृति का था। कोर्ट ने माना कि 10 वर्षों से अधिक सेवा लेने के बाद उन्हें संविदा बताना मनमाना है। कोर्ट ने कहा कि राज्य को अपने कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए। लंबे समय तक सेवा लेने के बाद कर्मचारियों को अनिश्चित स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता, विशेषकर तब जब आयु सीमा के कारण अन्य अवसर उनके लिए समाप्त हो चुके हों।

नियमितीकरण का निर्देश

हाई कोर्ट ने 25 अक्टूबर 2022 के राज्य शासन के आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दोनों याचिकाकर्ताओं की सेवाएं स्वीकृत पदों के विरुद्ध नियमित की जाएं। साथ ही उन्हें सेवा की निरंतरता, नियमित वेतनमान और अन्य सभी संबंधित लाभ देने का आदेश दिया गया है।


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