दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, एनएचएआई के चेयरमैन और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय यह सुनिश्चित करें कि इन आदेशों का सख्ती से पालन हो। खंडपीठ ने हिदायत देते हुए कहा, यदि किसी क्षेत्र में लापरवाही या बार-बार घटना होती है तो संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को देशभर में लागू करने का निर्देश दिया है।
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नेशनल और स्टेट हाईवे पर आवारा मवेशियों के कारण हो रही दुर्घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। एक आदेश जारी कर देशभर की सड़कों से आवारा मवेशियों और कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेशों के मुख्य सचिव, एनएचएआई के चेयरमैन और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय यह सुनिश्चित करें कि इन आदेशों का सख्ती से पालन किया जाए।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजनिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद राष्ट्रीय और राज्य प्राधिकरणों को आदेश देते हुए कहा कि अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से तुरंत आवारा मवेशियों व जानवारों को हटाएं। कोर्ट ने उन राजमार्गों और सार्वजनिक स्थानों की पहचान करने कहा, जहां आवारा जानवर अक्सर दिखाई देते हैं। ऐसे जानवारों को निश्चित जगह पर रखने का निर्देश अफसरों को दिया है। राजमार्गों और समान स्थलों पर नियमित अंतराल पर हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करने की बात कही है। दुर्घटना घटित होने की स्थिति में यात्री नंबर पर काल कर इसकी जानकारी संबंधितों तक पहुंचा सके। खंडपीठ ने आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से बरकरार रखा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये निर्देश
- सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निगम, सड़क परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे से सभी आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को हटाया जाए।
- संबंधित अधिकारी एक संयुक्त अभियान चलाकर उन सड़कों और राजमार्गों की पहचान करेंगे जहां अक्सर आवारा मवेशी या अन्य जानवर दिखाई देते हैं। उन्हें वहां से तत्काल हटाना होगा और तय जगह पर ले जाकर रखना होगा।
- पकड़े गए मवेशियों और अन्य जानवरों को उचित आश्रयों में रखना होगा।
- सभी राजमार्गों पर समर्पित पेट्रोलिंग टीम या मौजूदा सड़क सुरक्षा इकाइयां नियुक्त की जाए जो चौबीस घंटे काम करें और स्थानीय पुलिस, पशु चिकित्सक तथा नगर निकायों के साथ समन्वय बनाए रखें।
- सभी राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर हेल्पलाइन नंबर नियमित अंतराल पर लगाए।








