Civil India News App Download
📢 Advertise With Us

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड भी हो सकते हैं फर्जी

Share on

दिल्ली। बिहार में चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में किसी तरह के रद्दोबदल से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने 8 सितंबर को जारी आदेश में आधार कार्ड को पहचान पत्र में रूप में स्वीकार करने का निर्देश भारत निर्वाचन आयोग को दिया था।

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ECI को निर्देश दिया था कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करने की औपचारिक सूचना जारी करे। कोर्ट ने कहा, यह आदेश अंतरिम है और आधार की वैधता पर अंतिम फैसला अभी लंबित है। मामले की सुनवाई के दौरान सत्यता को लेकर जब सवाल खड़ा किया गया तब कोर्ट ने कहा कि जैसे आधार फर्जी हो सकता है, वैसे ही राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी फर्जी हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ आधार को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी कोर्ट ने भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

Also Read – सुप्रीम फैसला: बिना वारंट तलाशी लेनी है, तो कारण बताना होगा

याचिकाकर्ता ने आधार के बारे में कहा था कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, इसे अन्य दस्तावेजों के बराबर नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है। कोर्ट ने कहा कि अगर इसमें कोई गैरकानूनी गतिविधि पाई गई तो पूरी प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाएगा।
आधार की वैधता पर अभी अंतिम फैसला नहीं, बिहार SIR पर फैसला पूरे देश पर लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिहार में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उसका फैसला पूरे देश में इसी तरह की प्रक्रिया पर लागू होगा। यानी अगर कोर्ट इसे अवैध मानता है तो देशभर में चल रही ऐसी सभी कवायदों पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग को देशभर में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया चलाने से नहीं रोक सकता।

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

Also Read – सुप्रीम कोर्ट की SIT से वंतारा को क्लीन चिट

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 7 अक्टूबर को होने वाली अंतिम सुनवाई में बिहार के साथ-साथ देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया पर भी दलीलें रखने की अनुमति दी है। कोर्ट इस मामले को सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रखेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में कोई आंशिक या टुकड़ों में राय नहीं देगा। वह पूरी प्रक्रिया की वैधता पर एक बार में अंतिम फैसला देगा। इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि कोर्ट कुछ अंतरिम निर्देश जारी करे, पर बेंच नहीं मानी।

वोटर लिस्ट से 65 लाख नाम डिलीट
बिहार में SIR प्रक्रिया के तहत अब तक 65 लाख मतदाताओं के नाम को मतदाता सूची से डिलीट कर दिया है। मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम डिलीट होने के कारण, चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।


Share on
Civil India News App Download
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!