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वेटिंग लिस्ट को स्थायी भर्ती का स्रोत नहीं माना जा सकता: भर्ती नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

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दिल्ली। भर्ती नियमों को खासकर वेटिंग लिस्ट की शर्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि वेटिंग लिस्ट को स्थायी भर्ती का स्रोत नहीं माना जा सकता। वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थी का दावा व अधिकार तब खत्म हो जाता है जब सभी चयनित पदों पर उम्मीदवार शामिल हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका को स्वीकार करते हुए कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है।

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केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वेटिंग लिस्ट रिजर्व लिस्ट का संचालन अनिश्चित काल के लिए नहीं हो सकता। जब सभी पद भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भर दिए जाते हैं, तब यह वेटिंग लिस्ट स्वत: समाप्त हो जाती है। इस टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने काेलकाता हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें हाई कोर्ट ने कई साल बाद वेटिंग लिस्ट के जरिए उम्मीदवार को नौकरी देने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम काेर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस पी.एस.नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने कहा कि वेटिंग लिस्ट में शामिल उम्मीदवार का दावा तब समाप्त हो जाता है, जब सभी चयनित उम्मीदवार अपने-अपने पदों पर ज्वाइनिंग देने के बाद कामकाज संभाल लेते हैं। डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि वेटिंग लिस्ट को स्थायी भर्ती का स्रोत नहीं माना जा सकता है। जब वेटिंग एक बार समाप्त हो जाता है तब इसे दोबारा रिक्त पद भरने के लिए इसे लागू नहीं किया जा सकता।

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क्या है मामला

वर्ष 1997 में ऑल इंडिया रेडियो द्वारा तीन तकनीशियन पदों की भर्ती से जुड़ा था। तीनों पद अनुसूचित जाति उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखा गया था। प्रतिवादी को रिजर्व पैनल वेटिंग लिसट में पहला स्थान मिला, लेकिन सभी चयनित उम्मीदवार अपने पदों पर शामिल होने के साथ ही अपनी ज्वाइनिंग दे दी थी। लिहाजा यह वेटिंग लिस्ट निष्क्रिय हो गया। उम्मीदवार ने ट्रिब्यूनल में मामला दायर किया। ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि जैसे ही वेकेंसी आएगी उसे नियुक्ति दी जाएगी। इसी आश्वसान को आधार बनाकर उम्मीदवार ने 25 साल हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इससे नई भर्ती में आने वाले उम्मीदवारों के अधिकारों को नुकसान होगा

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण CAT और हाई कोर्ट ने प्रारंभ में यह नोट किया था कि वेटिंग लिस्ट में शामिल उम्मीदवार को नियुक्ति का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उम्मीदवार का दावा बाद की भर्तियों के दौरान पुनः उभरा। 2024 में, कोलकाता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता उम्मीदवार को नियुक्ति देने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकार की ओर से दिया गया आश्वासन चाहे गंभीर महत्व रखता हो, लेकिन यदि इसका पालन किसी वैधानिक नियम या प्रावधान का उल्लंघन करता है, तो इसे लागू नहीं किया जा सकता।

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कोर्ट ने आगे कहा, वेटिंग लिस्ट में शामिल उम्मीदवार बाद में सेवा में स्थायी रूप से शामिल होने का अधिकार नहीं मांग सकता। इससे नई भर्ती में आने वाले उम्मीदवारों के अधिकारों को नुकसान होगा। पिछली भर्ती के आधार पर किसी पद को भरना, भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों के लिए अन्यायपूर्ण होगा। डिवीजन बेंच ने कहा कि 1997 में उपलब्ध सभी रिक्त पद भर जाने के कारण वेटिंग लिस्ट समाप्त हो गई और भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।


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