हाई कोर्ट ने दो सप्ताह में निर्णय लेने दिया था निर्देश, फाइल कहां दबी या दबा दी गई, पता ही नहीं?
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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण और स्थानांतरण को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। कोरबा जिले का एक मामला तो अब और भी पेचीदा हो गया है। हाई कोर्ट ने बीईओ अभिमन्यु टेकाम द्वारा दायर याचिका में जिला स्तरीय समिति को दो सप्ताह के भीतर उनके अभ्यावेदन का निराकरण करने का निर्देश दिया था। लेकिन दो सप्ताह क्या—चार महीने बीत चुके, न निराकरण का कोई अता-पता है और न ही फाइल कहां अटकी है, यह कोई बताने को तैयार है। इसी ‘अनिश्चितता’ का फायदा उठाकर याचिकाकर्ता अब भी अपने पद पर बने हुए हैं।

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कोरबा का यह प्रकरण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। चर्चा यह है कि या तो समिति ने निर्णय लिया ही नहीं, या फिर जानबूझकर उसका आदेश संबंधित अधिकारी तक पहुंचने नहीं दिया गया। परिणाम यह कि कटघोरा में स्थानांतरित होकर आए सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी हरिकृष्ण नायक अब तक प्रभार नहीं ले सके और बिना प्रभार के ही कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

स्थानांतरण आदेश, याचिका और कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

10 जुलाई 2025 को जारी आदेश के तहत प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) अभिमन्यु टेकाम का ट्रांसफर बम्हनीडीह कर दिया गया था। टेकाम ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि उनका अभ्यावेदन जिला स्तरीय समिति के पास लंबित है और उस पर फैसला नहीं हुआ है। कोर्ट ने उनकी बात मानते हुए उन्हें समिति के समक्ष दोबारा अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया और समिति को दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश जारी किया। हाई कोर्ट का निर्देश बेहद स्पष्ट था, अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार निष्पक्ष निर्णय लिया जाए और तब तक याचिकाकर्ता पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो। लेकिन तय समयसीमा के बीत जाने के बाद भी न तो निर्णय का कोई रिकॉर्ड सामने आया है और न ही आदेश की प्रति अधिकारी तक पहुंची है। इस स्थिति ने पूरे मामले को संदेहास्पद बना दिया है।

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क्या यह न्यायालय की अवमानना का मामला?

जिस तरह समिति ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया, उसे न्यायालयीन अवमानना की श्रेणी में देखा जा रहा है। नियम के अनुसार निर्धारित समय में निराकरण न करना अधिनियम का उल्लंघन है और समिति के अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसी लापरवाही जारी रही तो संबंधित अधिकारियों पर अवमानना याचिका भी दायर की जा सकती है।

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स्थानांतरण नियम और आंतरिक उपाय

याचिकाकर्ता के अनुसार, 05 जून 2025 की स्थानांतरण नीति के तहत कोई भी कर्मचारी अपनी शिकायत समिति के समक्ष रख सकता है, बशर्ते उस पर स्पष्ट और तथ्यात्मक आधार हों। नियम यह भी कहता है कि कर्मचारी ट्रांसफर आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपना अभ्यावेदन वरिष्ठ सचिवों की समिति को भेज सकता है, जो नीति के अनुरूप मामले की जांच करके विभाग को अनुशंसा भेजेगी। हाई कोर्ट ने इसी प्रक्रिया को देखते हुए टेकाम को निर्देश दिया था कि वे आदेश की प्रति प्राप्त होने से एक सप्ताह के भीतर समिति के समक्ष नया अभ्यावेदन दें और समिति को दो सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया था।


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