डीईओ ने हेड मास्टर को किया संस्पेंड, शिक्षिका की रोकी इंक्रीमेंट
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बिलासपुर। बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक पाठशाला मटियारी में लंबे समय से चल रहा शिक्षक-विवाद आखिरकार प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया। स्कूल में पढ़ाई का माहौल बिगड़ने और बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ने की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने कड़ा कदम उठाया है। मामले में हेड मास्टर को निलंबित कर दिया गया है, जबकि सहायक शिक्षिका की एक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकने का आदेश जारी किया गया है।

जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित इस प्राथमिक स्कूल में हेड मास्टर और सहायक शिक्षिका के बीच लंबे समय से आपसी मनमुटाव और टकराव चल रहा था। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि इसका सीधा असर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ने लगा। पढ़ाई-लिखाई बाधित हो रही थी, अनुशासनहीनता बढ़ रही थी और बच्चों का ध्यान शिक्षा से भटकने लगा था। ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी स्कूल के बिगड़ते माहौल को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद शिकायतें जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचीं।

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शिकायतों के आधार पर डीईओ ने बिल्हा विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले की जांच सौंपी। जांच के दौरान सामने आया कि स्कूल में केवल आपसी मतभेद ही नहीं, बल्कि अनुशासनहीनता और कर्तव्य में लापरवाही जैसी गंभीर समस्याएं भी मौजूद हैं। जांच रिपोर्ट में हेड मास्टर प्रताप सत्यार्थी पर आरोपों की पुष्टि हुई कि वे कई बार शराब के नशे में स्कूल पहुंचे, समय पर विद्यालय नहीं आए और निर्धारित समय से पहले ही स्कूल छोड़ देते थे। इसके अलावा अन्य शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सही पाई गईं।

वहीं सहायक शिक्षिका सुपर्णा टेंगवार के संबंध में जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि उन्होंने शैक्षणिक अभिलेखों में अनियमितता की, उपस्थिति पंजी में काट-छांट की और छात्रों के माध्यम से अन्य शिक्षकों के वीडियो बनवाकर उन्हें परेशान करने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई। इन कृत्यों को अनुशासन के खिलाफ मानते हुए डीईओ ने उन्हें दंडित करने का निर्णय लिया।

बीईओ की रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे ने कार्रवाई करते हुए हेड मास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और सहायक शिक्षिका की एक इंक्रीमेंट रोकने का आदेश जारी किया। अधिकारियों का कहना है कि स्कूल का माहौल खराब होने का सबसे बड़ा नुकसान बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास को होता है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहली कार्रवाई नहीं है। शराब पीकर स्कूल आने, छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार करने और आपसी विवाद के कारण अब तक जिले में तीन दर्जन से अधिक शिक्षक और कर्मचारी कार्रवाई की जद में आ चुके हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में अनुशासन, शालीनता और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना प्राथमिकता है और जो भी शिक्षक या कर्मचारी इसमें बाधा बनेंगे, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।


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