CG School News बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षकों की पोस्टिंग, संशोधन आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने संयुक्त संचालक शिक्षा से तीन दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार कई शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापना आदेश जिला स्तरीय समिति की मंजूरी के बिना बदले गए। जबकि शासन के निर्देशानुसार युक्तियुक्तकरण से जुड़े विवाद, दावा-आपत्ति और संशोधन का अंतिम निर्णय समिति की अनुशंसा से होना चाहिए।
सैकड़ों आदेशों में फेरबदल का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में पोस्टिंग आदेशों में बाद में बदलाव किए गए। कुछ मामलों में रिकॉर्ड अधूरा मिला, तो कुछ फाइलों में आवश्यक अनुमोदन तक नहीं पाए गए। आरोप है कि चुनिंदा शिक्षकों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया।
पसंदीदा जगहों पर पोस्टिंग का मामला
विभाग के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि कई शिक्षकों को दूरस्थ क्षेत्रों के बजाय शहर और सुविधा वाले स्कूलों में समायोजित किया गया। इससे पात्र शिक्षकों में नाराजगी है। आरोप यह भी है कि नियमों से ज्यादा “सिफारिश” को महत्व दिया गया।
पुराने भुगतान मामलों ने भी बढ़ाई मुश्किल
इसी बीच कोटा विकासखंड से जुड़े वित्तीय अनियमितता के पुराने मामले भी फिर चर्चा में आ गए हैं। लाखों रुपये के संदिग्ध भुगतान और कार्यालय स्तर पर लापरवाही को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अब नए विवाद के बाद इन मामलों की भी दोबारा जांच की मांग उठ रही है।
छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े नाम बाहर?
अब तक कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई नहीं होने से असंतोष है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि केवल निचले स्तर पर कार्रवाई कर बड़े जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है।
शिकायत के बाद कलेक्टर सख्त
युवा कांग्रेस नेता अंकित गौराहा सहित अन्य पक्षों द्वारा दस्तावेजों के साथ शिकायत दिए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर ने संयुक्त संचालक शिक्षा से पूरे प्रकरण की बिंदुवार जानकारी, जिम्मेदार अधिकारियों के नाम और अब तक की कार्रवाई की स्थिति मांगी है।