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CG Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट का जाल: प्रोफेसर से 1.04 करोड़ की ठगी, 7 दिन कैद

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CG Cyber Fraud: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को ऑनलाइन तरीके से “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर ठगों ने एक करोड़ से ज्यादा रकम हड़प ली। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर महिला को डराया और कई दिनों तक मानसिक दबाव में रखा।

बताया जा रहा है कि ठगों ने महिला को टेरर फंडिंग जैसे गंभीर आरोपों में फंसाने की धमकी दी। साथ ही उनके बेटे और पोते को जेल भेजने की बात कहकर इतना भय पैदा कर दिया कि उन्होंने निर्देशानुसार अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।

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वीडियो कॉल से शुरू हुआ खेल

घटना की शुरुआत एक वीडियो कॉल से हुई, जिसमें आरोपी ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उसने महिला को बताया कि उनका नाम एक संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में सामने आया है। इसके बाद उन्हें घंटों तक कॉल पर रोके रखा गया, जिससे वे पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गईं ठगों ने फर्जी दस्तावेज भी भेजे, जिनमें कथित कोर्ट वारंट और जांच एजेंसियों के नोटिस शामिल थे। इन कागजों को देखकर महिला को लगा कि मामला गंभीर है और गिरफ्तारी तय है।

एक हफ्ते तक चलता रहा डिजिटल दबाव

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करीब सात दिनों तक महिला को लगातार निर्देश दिए जाते रहे। इस दौरान उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी को जानकारी न देने के लिए कहा गया। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके घर के आसपास निगरानी की जा रही है। डर के माहौल में महिला ने अलग-अलग तारीखों में कई किश्तों में पैसे ट्रांसफर कर दिए। कुल मिलाकर लगभग 1 करोड़ 4 लाख रुपये ठगों के खातों में पहुंच गए।

और पैसे की मांग ने खोला राज

इतनी बड़ी रकम लेने के बाद भी आरोपियों ने 50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग कर दी। जब महिला के पास पैसे खत्म हो गए, तब उन्होंने अपने बेटे को फोन कर मदद मांगी। बातचीत के दौरान बेटे को शक हुआ और उसने तुरंत बिलासपुर पहुंचकर पूरी जानकारी ली। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

पुलिस जांच में जुटी, बढ़ रहे ऐसे मामले

मामले की जानकारी मिलते ही साइबर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से फर्जी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ठगी को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि हाल के महीनों में “डिजिटल अरेस्ट” के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, खासकर बुजुर्गों और रिटायर्ड लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल के जरिए इस तरह की कार्रवाई नहीं की जाती। अगर कोई खुद को पुलिस या एजेंसी बताकर पैसे मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।


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