CG Teacher News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों में है। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय ने समाप्त हो चुके आदेश को आधार बनाकर चुनिंदा शिक्षकों को हेड मास्टर के पद पर पदोन्नति दे दी, जबकि कई वरिष्ठ शिक्षक अब भी इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे मामले ने विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुराने आदेश से नई पदोन्नति का खेल
जानकारी के मुताबिक, जिस विभागीय आदेश का इस्तेमाल पदोन्नति के लिए किया गया, उसकी वैधता पहले ही समाप्त हो चुकी थी। यह आदेश मूल रूप से उन शिक्षकों के लिए जारी हुआ था जो विभागीय त्रुटि के कारण पहले प्रमोशन से वंचित रह गए थे। लेकिन आरोप है कि इसी आदेश को आधार बनाकर कुछ चयनित शिक्षकों को फायदा पहुंचाया गया और उन्हें सीधे पदोन्नत कर पोस्टिंग भी दे दी गई।
डीपीसी खत्म, फिर भी जारी हुआ आदेश
दिसंबर 2024 में हुई विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया (DPC) के तहत वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार की गई थी। लेकिन लगभग दो साल बाद उसी प्रक्रिया से जुड़ी वेटिंग लिस्ट को आधार बनाकर मार्च 2026 में नई पदोन्नतियां दे दी गईं। सवाल यह उठ रहा है कि जब DPC की अवधि खत्म हो चुकी थी, तो उसी सूची से दोबारा चयन कैसे किया गया।
वरिष्ठता को दरकिनार करने के आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पदोन्नति के दौरान वरिष्ठता क्रम का पालन नहीं किया गया। जिन शिक्षकों के नाम सूची में ऊपर थे, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि उनसे नीचे के क्रम वाले शिक्षकों को पदोन्नति मिल गई। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि पूरी प्रक्रिया में पक्षपात किया गया।
सीमित पदोन्नति, प्रक्रिया पर सवाल
पदोन्नति की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। न तो किसी प्रकार की काउंसलिंग की गई और न ही सभी रिक्त पदों को भरा गया। केवल कुछ चुनिंदा शिक्षकों को ही चुपचाप आदेश जारी कर अलग-अलग स्कूलों में पदस्थ कर दिया गया। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि चयन का आधार क्या था और बाकी पात्र शिक्षकों को क्यों बाहर रखा गया।
शिकायत के बाद बढ़ी सियासी हलचल
मामले को लेकर शिकायतें भी सामने आई हैं। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में लेन-देन और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। इस संबंध में उच्च स्तर तक शिकायत पहुंचने के बाद अब जांच की मांग तेज हो गई है।