CG ED Raid: रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई में एक साथ छापेमारी की है। जांच एजेंसी की टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर कारोबारी और संबंधित व्यक्तियों के ठिकानों की तलाशी ले रही हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई कथित शराब घोटाले और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच के सिलसिले में की जा रही है।
कई शहरों में एक साथ दबिश
बिलासपुर में एक ज्वेलरी कारोबारी के प्रतिष्ठान और उससे जुड़े ठिकानों पर जांच जारी है। वहीं दुर्ग में एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़े कारोबारी और भिलाई में उद्योग से जुड़े व्यक्ति के घर व फैक्ट्री को भी जांच के दायरे में लिया गया है। ईडी की टीमें दस्तावेज, लेन-देन के रिकॉर्ड और निवेश से जुड़ी जानकारी खंगाल रही हैं।
शराब घोटाले से जुड़े तार तलाश रही एजेंसी
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई कथित शराब घोटाले में फरार आरोपी और उसके नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लिंक की पड़ताल के लिए की जा रही है। जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों के जरिए पैसों का प्रवाह हुआ और किन-किन व्यवसायों में इस रकम का इस्तेमाल किया गया।
भारतमाला प्रोजेक्ट भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े मुआवजा घोटाले की कड़ियां भी सामने आ रही हैं। आरोप है कि प्रोजेक्ट से प्रभावित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-फरोख्त में अनियमितता हुई और बाद में उन्हीं जमीनों पर मुआवजा लिया गया। इस मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि मुआवजा प्रकरणों को तैयार करने और आगे बढ़ाने में कुछ राजस्व अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है। पहले दर्ज मामले में कई अधिकारियों और बिचौलियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अब ईडी इस पूरे नेटवर्क को जोड़कर बड़े स्तर पर जांच कर रही है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों तक की भूमिका खंगाली जा रही है।
दस्तावेजों से खुल सकते हैं बड़े राज
छापेमारी के दौरान जब्त किए जा रहे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जांच का अहम आधार बन सकते हैं। एजेंसी इन रिकॉर्ड्स के जरिए पैसों के लेन-देन, संपत्तियों की खरीद और संभावित फर्जीवाड़े की परतें खोलने की कोशिश कर रही है।