CG Yuktiyuktkaran Scam: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है। आरोप है कि जिन मामलों को जिला और संभागीय स्तर पर खारिज किया जा चुका था, उन्हीं पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने दोबारा आदेश जारी कर पदस्थापना कर दी। इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और अधिकारों की सीमाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
खारिज अभ्यावेदन को फिर से किया मान्य
सूत्रों के मुताबिक, एक शिक्षक द्वारा युक्तियुक्तकरण के तहत हुए ट्रांसफर को चुनौती दी गई थी। पहले यह मामला जिला स्तरीय समिति के पास गया, जहां कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों ने अभ्यावेदन को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद संभागीय स्तर पर कमिश्नर और संयुक्त संचालक (JD) की समिति ने भी उसी निर्णय को बरकरार रखते हुए आवेदन खारिज कर दिया। लेकिन बाद में जिला शिक्षा अधिकारी ने उसी मामले पर पुनः विचार करते हुए आदेश बदल दिया और संबंधित शिक्षक को पुराने स्थान पर ही पदस्थ कर दिया।
अधिकार क्षेत्र पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी मामले पर जिला और संभाग दोनों स्तर की समितियां अंतिम निर्णय दे चुकी थीं, तो फिर डीईओ को उस फैसले में बदलाव करने का अधिकार कैसे मिला? नियमों के अनुसार, उच्च स्तर पर खारिज हो चुके मामलों में दोबारा आदेश जारी करना प्रक्रिया के विपरीत माना जाता है।
नई पदस्थापना से बढ़ा विवाद
नए आदेश के तहत संबंधित शिक्षक को उनके पूर्व पदस्थ स्थान पर वापस भेज दिया गया, जबकि पहले की सभी समितियां उस स्थानांतरण को सही ठहरा चुकी थीं। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया से अलग बताया जा रहा है, बल्कि इससे अन्य शिक्षकों के बीच भी असंतोष बढ़ने की आशंका है।
कई मामलों में दोहराया गया पैटर्न
बताया जा रहा है कि यह केवल एक मामला नहीं है। ऐसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं, जिनमें पहले खारिज अभ्यावेदन को बाद में मान्य कर पोस्टिंग आदेश जारी किए गए। इनमें से कई मामलों की जानकारी उच्च अधिकारियों तक भी समय पर नहीं पहुंची।
शिकायत के बाद भी धीमी जांच
मामले को लेकर दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई गई है और जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो पूरे युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।