Bilaspur High Court: फर्जी सर्कुलर के आधार पर महिला डॉक्टर को मिली राहत, हाई कोर्ट ने वापस लिया अपना फैसला

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Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में पहली बार ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जब अदालत ने खुद अपना पूर्व आदेश वापस लिया। मामला एक महिला आयुर्वेदिक चिकित्सक से जुड़ा है, जिन्होंने नियमितिकरण की मांग करते हुए याचिका दायर की थी और उसके समर्थन में राज्य सरकार का एक कथित सरकारी सर्कुलर प्रस्तुत किया था। उसी दस्तावेज को आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने संविदा चिकित्सक को राहत देते हुए नियमितिकरण संबंधी आदेश पारित किया था।

करीब पांच महीने बाद महिला चिकित्सक को यह जानकारी मिली कि जिस सर्कुलर के आधार पर उन्होंने अदालत से राहत प्राप्त की थी, उसे राज्य सरकार पहले ही फर्जी घोषित कर चुकी है। इसके बाद डॉक्टर ने स्वयं हाई कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल कर पूरी स्थिति स्पष्ट की और अदालत से माफी मांगते हुए कहा कि यह गलती अनजाने में हुई है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपना पुराना आदेश वापस लेते हुए मूल याचिका को फिर से सुनवाई के लिए बहाल कर दिया है।

जानिए पूरा मामला क्या है?

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के मोपका प्राथमिक स्वास्थ्य आयुष केंद्र में संविदा आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी के रूप में पदस्थ डॉ. ममता मिश्रा ने नियमितिकरण की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका के साथ उन्होंने 28 मई 2010 का एक सरकारी सर्कुलर संलग्न किया था, जिसमें संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर विचार किए जाने का उल्लेख था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि वे करीब 18 वर्षों से सेवा दे रही हैं और नियमितिकरण की पात्र हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को आदेश पारित कर याचिकाकर्ता को नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने तथा संबंधित विभाग को वर्ष 2010 के सर्कुलर के आधार पर चार महीने के भीतर नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। बाद में महिला चिकित्सक को जानकारी मिली कि जिस सर्कुलर के आधार पर मामला जीता गया, उसे राज्य शासन ने पहले ही फर्जी और मनगढ़ंत घोषित कर दिया था। शासन ने 2 जून 2010 को जारी स्पष्टीकरण में साफ कहा था कि 28 मई 2010 का कथित सर्कुलर वैध नहीं है।

रिव्यू पिटिशन में महिला चिकित्सक ने क्या कहा?

महिला चिकित्सक ने हाई कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल कर कहा कि उन्हें सर्कुलर के फर्जी होने की जानकारी नहीं थी और यह चूक अनजाने में हुई। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण मंशा नहीं थी। यही वजह रही कि हाई कोर्ट से आदेश मिलने के बावजूद उन्होंने विभाग के समक्ष किसी प्रकार का दावा या अभ्यावेदन पेश नहीं किया।

याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया कि पुराने आदेश को निरस्त कर मूल याचिका को फिर से बहाल किया जाए, ताकि सही तथ्यों और वैध दस्तावेजों के आधार पर मामले की सुनवाई हो सके। हाई कोर्ट ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका को दोबारा सुनवाई के लिए बहाल कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के पुराने आदेश के आधार पर विभाग में किसी प्रकार की जॉइनिंग या लाभ प्राप्त नहीं किया है। सरकार ने यह भी कहा है कि फर्जी सर्कुलर तैयार करने और प्रसारित करने के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


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