Bilaspur High Court: बिलासपुर। अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोपों को लेकर दायर मामले में अब अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति और राज्य शासन के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी है।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी का आरोप
याचिकाकर्ता जय श्री सिंह पुसाम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि कई लोग फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनवाकर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में नौकरी कर रहे हैं। इससे वास्तविक आदिवासी युवाओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और आरक्षित पदों का लाभ अपात्र लोगों को मिल रहा है। याचिका में कहा गया है कि पहले दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने 17 जून 2025 को जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराने और फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
अधिकारियों पर कोर्ट आदेश की अवहेलना का आरोप
अवमानना याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। इससे कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारक अब भी सरकारी पदों पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण वास्तविक अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र युवाओं को नौकरी और आरक्षण के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।
हाई कोर्ट ने तय की जांच की समय सीमा
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पूर्व आदेश में जांच पूरी करने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नए सिरे से दिए जाने वाले अभ्यावेदन पर चार महीने के भीतर जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग के अधिकारियों के समक्ष नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के बाद चार महीने के भीतर शिकायतों की जांच कर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी।