अधिकारियों, कर्मचारियों को ट्रेनिंग लेना जरूरी, अप्रैल का नहीं मिलेगा वेतन
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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम को प्रदेश में सख्ती से लागू कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी निर्देशों के बाद राज्य के सभी सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी अधिकारी और कर्मचारियों को iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर पंजीयन कर कम से कम तीन अनिवार्य प्रशिक्षण (कोर्स) पूरे करने होंगे। जो अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर यह प्रशिक्षण पूरा नहीं करेंगे, उन्हें अप्रैल माह का वेतन नहीं मिलेगा।

सामान्य प्रशासन विभाग ने यह भी साफ किया है कि केवल पंजीयन ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण पूरा करने के प्रमाण पत्रों की जांच भी अनिवार्य होगी। वेतन आहरण से पहले संबंधित डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) को यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिकारी या कर्मचारी ने तय कोर्स पूरे कर लिए हैं। प्रमाण पत्रों की पुष्टि के बाद ही सैलरी जारी की जाएगी। इस सख्त व्यवस्था के चलते सभी विभागों में कर्मचारियों के बीच हलचल तेज हो गई है।

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जीएडी के आदेश के अनुसार, iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर प्रत्येक विभाग को कम से कम पांच कोर्स अपडेट करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के एपीएआर (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन) के लिए हर अधिकारी और कर्मचारी को न्यूनतम तीन कोर्स पूरा करना जरूरी कर दिया गया है। तय समय में प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वालों का वेतन रोके जाने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का विस्तृत प्रोफाइल तैयार किया जाएगा। इस प्रोफाइल में पदनाम, विभाग, संगठन का नाम, एनआईसी ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर अपडेट करना अनिवार्य होगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए न सिर्फ राज्य सरकार बल्कि केंद्र सरकार भी कर्मचारियों के प्रशिक्षण, कार्यक्षमता और प्रगति की सीधी निगरानी करेगी।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि भारत सरकार ने मिशन कर्मयोगी के तहत यह एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता निर्माण, कौशल विकास और सतत प्रशिक्षण सुनिश्चित करना है। इसके तहत छत्तीसगढ़ शासन के सभी विभागों को डिपार्टमेंटल कैपेसिटी बिल्डिंग यूनिट (DCBU) गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक विभाग अपने कार्य आवंटन और जिम्मेदारी दस्तावेजों के आधार पर क्षमता निर्माण योजनाएं तैयार करेगा और उन्हें प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेगा। जीएडी ने यह भी कहा है कि विभागीय अधिकारी अपने कर्मचारियों को निर्धारित प्रशिक्षण कोर्स में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो समय-सीमा और निर्देशों के पालन की जिम्मेदारी संभालेगा। यदि तय समय में निर्देशों का पालन नहीं होता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी।

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मिशन कर्मयोगी के तहत प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं रहेगा। कोर्स पूरा होने के बाद कर्मचारियों का मूल्यांकन किया जाएगा और परीक्षा भी ली जाएगी। परीक्षा में सफल होने पर डिजिटल प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। यह प्रमाणन कर्मचारी के एपीएआर से जोड़ा जाएगा, जो भविष्य में पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों का एक अहम आधार बनेगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिकारियों और कर्मचारियों में कार्य के दौरान सीखने की संस्कृति विकसित होगी। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन, सहकर्मियों के साथ अनुभव साझा करना और डिजिटल माध्यमों से नवीन कौशल सीखना शामिल है। कुल मिलाकर, मिशन कर्मयोगी को छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक सुधार और क्षमता निर्माण का एक मजबूत औजार बना दिया है, जिसके प्रभाव आने वाले समय में पदोन्नति, मूल्यांकन और वेतन जैसे अहम पहलुओं पर साफ तौर पर दिखाई देंगे।


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