CG Crime News: बलौदाबाजार। बलौदाबाजार जिले के खर्वे गांव में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों का रहस्य गहराता जा रहा है। जहरीली शराब से मौत हुई या शराब में जहर मिलाकर लोगों की हत्या की गई, इसकी सच्चाई जानने के लिए पुलिस और प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को पुलिस, राजस्व अधिकारियों और फोरेंसिक टीम की मौजूदगी में गांव में दफन सात शवों को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। पूरे गांव में दहशत का माहौल है और श्मशान घाट पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी हुई है।
मौतों के रहस्य से पर्दा उठाने कब्र से निकाले जा रहे शव
खर्वे गांव में बीते कुछ महीनों के दौरान शराब पीने के बाद एक के बाद एक आठ ग्रामीणों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। लगातार हो रही मौतों के बाद ग्रामीणों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल जहरीली शराब का मामला नहीं है, बल्कि शराब में जहर मिलाकर लोगों को मौत के घाट उतारने की आशंका भी है।

ग्रामीणों की शिकायत और बढ़ते संदेह को देखते हुए जिला प्रशासन ने दफन किए गए शवों को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया। इसी कड़ी में दो दिन पहले एक शव निकाला गया था, जबकि मंगलवार को सात अन्य शवों को कब्र से निकालने की कार्रवाई की जा रही है।
श्मशान घाट में उमड़ी भीड़, गांव की गलियां सूनी
मंगलवार सुबह से ही पुलिस, राजस्व विभाग और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम खर्वे गांव पहुंच गई। अधिकारियों की मौजूदगी में कब्रों की खुदाई कर शव बाहर निकाले जा रहे हैं। पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सकों की टीम भी मौके पर मौजूद है।

घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्सुकता और चिंता का माहौल है। लगभग पूरा गांव श्मशान घाट पर मौजूद है, जबकि गांव की गलियां सूनी नजर आ रही हैं। लोगों की निगाहें अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे मौतों की असली वजह सामने आ सके।
14 मई की घटना के बाद बढ़ा संदेह
ग्रामीणों के अनुसार 14 मई की घटना के बाद पहली बार उन्हें किसी बड़ी साजिश की आशंका हुई। बताया जाता है कि गांव का एक व्यक्ति प्रमोद शराब लेकर आया था। वह शराब की बोतल लेकर एक दुकान में गया और कुछ देर बाद वापस लौटा। बाद में उसने वह शराब कार्तिक मांझी को दी।
ग्रामीणों का दावा है कि जैसे ही कार्तिक ने शराब के दो घूंट पिए, उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोशी की हालत में पहुंच गया। इसी घटना के बाद लोगों को संदेह हुआ कि मामला केवल खराब या जहरीली शराब का नहीं, बल्कि शराब में जहर मिलाने का भी हो सकता है।
इन ग्रामीणों की हो चुकी है मौत
शराब पीने के बाद अलग-अलग समय पर जिन ग्रामीणों की मौत हुई, उनमें शामिल हैं—
- बद्री पटेल — 6 फरवरी
- बुटालू साहू — 20 फरवरी
- बुधराम जायसवाल — 12 मार्च
- छत्तूराम साहू — 20 मार्च
- विनोद साहू — 31 मार्च
- गजानंद मांझी — 28 अप्रैल
- चैतूराम साहू — 29 अप्रैल
- महेतरु साहू — 14 मई
इन सभी मौतों ने गांव में भय और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।
फोरेंसिक जांच से खुलेगा मौतों का राज
पुलिस अधिकारियों के अनुसार कब्र से निकाले गए शवों का वैज्ञानिक तरीके से पोस्टमार्टम कराया जाएगा। विसरा और अन्य नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौतें जहरीली शराब के कारण हुईं या फिर किसी अन्य साजिश का परिणाम थीं।
फिलहाल गांव में हर कोई जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। आठ मौतों के बाद खर्वे गांव में भय, संशय और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। प्रशासन का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।