Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने शासकीय नवीन महाविद्यालय, चंद्रपुर (जिला सक्ती) में पदस्थ एक अतिथि व्याख्याता की सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस बी.डी. गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि अतिथि व्याख्याता नीति-2024 के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
बिना नोटिस सेवा समाप्ति पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
याचिकाकर्ता डॉ. लक्ष्मी प्रसाद कर्ष ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में बताया कि वे हिंदी विषय के अतिथि व्याख्याता के रूप में 12 अगस्त 2024 से शासकीय नवीन महाविद्यालय, चंद्रपुर में कार्यरत हैं। उनकी सेवाओं का नवीनीकरण 26 जुलाई 2025 को भी किया गया था। इसके बावजूद 8 मई 2026 को जारी आदेश के माध्यम से उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली।
गेस्ट लेक्चरर नीति-2024 का हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि गेस्ट लेक्चरर नीति-2024 के क्लॉज 8.3 के अनुसार किसी भी अतिथि व्याख्याता की सेवाएं समाप्त करने अथवा हटाने से पहले सात दिन का कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया और सीधे सेवा समाप्ति का आदेश पारित कर दिया गया, जो नीति के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत है।
राज्य सरकार ने मांगा जवाब पेश करने के लिए समय
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया। कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया और पाया कि सेवा समाप्ति का आदेश एक शिकायत के आधार पर पारित किया गया है। हालांकि रिकॉर्ड में यह उल्लेख नहीं मिला कि गेस्ट लेक्चरर नीति-2024 के क्लॉज 8.3 के तहत याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
सेवा समाप्ति आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक
प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन की स्थिति पाते हुए हाई कोर्ट ने 8 मई 2026 को जारी सेवा समाप्ति आदेश के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
जस्टिस बी.डी. गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की है। अब राज्य सरकार के जवाब और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई होगी। हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से याचिकाकर्ता अतिथि व्याख्याता को फिलहाल बड़ी राहत मिली है, जबकि मामला अब विस्तृत न्यायिक परीक्षण के चरण में पहुंच गया है।