Bilaspur High Court News: बिलासपुर। बस्तर क्षेत्र में विकास और आजीविका मिशन से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) को एक सप्ताह के भीतर नया शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इसके बाद समय सीमा में कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा।
हाई कोर्ट ने दिया अंतिम अवसर
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व में जारी आदेशों के पालन की स्थिति पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी और निर्देश दिया कि मामले में हुए नवीन घटनाक्रमों और प्रगति की विस्तृत जानकारी शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत की जाए। डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अंतिम अवसर प्रदान करते हुए मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला लोकनाथ साहू उर्फ पिंटू द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। इससे पहले 25 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट के निर्देश पर गृह विभाग की ओर से एक शपथपत्र प्रस्तुत किया गया था। बाद में 24 मार्च 2026 को कोर्ट ने मामले में हुए नए घटनाक्रमों और प्रगति की जानकारी देने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग को नया शपथपत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा के भीतर नया शपथपत्र प्रस्तुत नहीं होने पर राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई।
राज्य सरकार ने बताया देरी का कारण
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रही शासकीय अधिवक्ता सौम्या राय ने कोर्ट को बताया कि शपथपत्र दाखिल करने में हुई देरी जानबूझकर नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव ने 13 मई 2026 को गृह विभाग का कार्यभार संभाला है। इसी बीच भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 12 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें बस्तर संभाग में विकासात्मक गतिविधियों और आजीविका योजनाओं की समीक्षा की जानी थी। राज्य सरकार का कहना था कि इस महत्वपूर्ण बैठक और विभागीय व्यस्तताओं के कारण संबंधित जानकारी समय पर संकलित नहीं की जा सकी।
याचिकाकर्ता ने नहीं जताई आपत्ति
याचिकाकर्ता लोकनाथ साहू की ओर से अधिवक्ता पार्थ कुमार झा ने कहा कि यदि राज्य सरकार को शपथपत्र दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
कोर्ट ने कहा— यह अंतिम मौका
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने प्रशासनिक परिस्थितियों और सरकारी कार्यों की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को एक सप्ताह का अंतिम अवसर प्रदान किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 24 मार्च 2026 के आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और निर्धारित समयावधि में नया शपथपत्र प्रस्तुत किया जाए। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
बस्तर विकास और आजीविका मिशन पर टिकी निगाहें
बस्तर क्षेत्र में विकास योजनाओं, आजीविका मिशन और उनसे जुड़े प्रशासनिक पहलुओं को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले नए शपथपत्र और अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां कोर्ट मामले की प्रगति की विस्तृत समीक्षा कर सकता है।