CG NEWS: बिलासपुर। शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोपों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) पर एक प्राचार्य ने रिश्वत मांगने, अभद्र व्यवहार करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और पुलिस अधीक्षक (SP) से की गई है। वहीं एक अन्य शिक्षक ने भी बिल भुगतान के बदले कमीशन मांगने की शिकायत दर्ज कराई है।
प्रिंसिपल ने लगाए गंभीर आरोप
शासकीय हाई स्कूल बचरवार, पेंड्रा के प्राचार्य संतोष कुमार राठौर ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी गौरेला डॉ. संजीव शुक्ला के खिलाफ लिखित शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पदोन्नति के बाद रिलीव करने के लिए उनसे 10 हजार रुपए की रिश्वत ली गई।
मेडिकल बिल पास कराने के लिए भी मांगी रकम
शिकायत के अनुसार, प्रधानपाठक रहते हुए उनकी दोनों आंखों का ऑपरेशन बिलासपुर में हुआ था। करीब 75 हजार रुपए का मेडिकल बिल BEO कार्यालय में जमा किया गया। प्राचार्य का आरोप है कि बिल भुगतान के एवज में 12 हजार रुपए की मांग की गई, जो उन्होंने दे दिए। इसके बावजूद करीब 38 हजार रुपए का एक बिल अब तक लंबित है।
GPF पासबुक में हस्ताक्षर के लिए भी पैसे मांगे
प्राचार्य ने शिकायत में कहा है कि जीपीएफ पासबुक में हस्ताक्षर कराने के लिए भी 6 हजार रुपए लिए गए। 16 अप्रैल 2026 को जब वे फिर कार्यालय पहुंचे, तो उनसे अतिरिक्त 5 हजार रुपए मांगे गए। रकम नहीं देने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
रिटायरमेंट से पहले बढ़ी चिंता
शिकायतकर्ता प्राचार्य का कहना है कि उनका सेवानिवृत्ति दिनांक 30 जून 2026 है। ऐसे में लंबित देयकों और भुगतान को लेकर वे परेशान और भयभीत हैं।
दूसरे शिक्षक ने भी लगाए आरोप
गौरेला क्षेत्र के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला उमरखोही के शिक्षक एलबी पवन कुमार ने भी BEO पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने शिकायत में कहा है कि जयपुर, राजस्थान में प्रशिक्षण में शामिल होने के बाद यात्रा भत्ता बिल जमा किया गया था, लेकिन भुगतान के लिए 50 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। शिकायत में जातिसूचक टिप्पणी और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
BEO ने आरोपों को बताया गलत
विकासखंड शिक्षा अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि प्राचार्य संतोष कुमार राठौर का प्रकरण दूसरे डीडीओ में चला गया है, उनका सर्विस बुक और एलपीसी भी भेजा जा चुका है। ऐसे में वे भुगतान कैसे कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्राचार्य की पत्नी ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत वेतन संबंधी जानकारी मांगी थी, जानकारी देने के बाद इस प्रकार की शिकायत की गई है।
जांच टीम गठित
कलेक्टर के निर्देश पर जीपीएम जिले के डीईओ रजनीश तिवारी ने दोनों शिकायतों की जांच के लिए टीम गठित कर दी है। जांच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।








