बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी बिलासपुर के कुलपति आलोक चक्रवाल का गरिमाहीन और अमर्यादित आचरण सामने आया है। कार्यक्रम के दौरान एक अतिथि को कुलपति ने अपमानित कर बाहर जाने को कह दिया। वजह सिर्फ इतनी थी कि मूल विषय छोड़कर कुलपति अपनी जीवन गाथा सुनाने लग गए थे। जब अतिथि ने मुख्य मुद्दे पर लौटने का निवेदन किया तो कुलपति आलोक चक्रवाल भड़क गए और अमर्यादित व्यवहार करते हुए अतिथि को कार्यक्रम छोड़कर जाने के लिए कह दिया।
इस दौरान एक अन्य अतिथि ने जब निवेदन करते हुए कुलपति से ऐसा ना करने का आग्रह किया और कहा कि आपके द्वारा ही आमंत्रित अतिथि हैं। तब कुलपति ने दोटूक कह दिया कि “यदि आपको भी तकलीफ है तो आप भी निकल जाइए, हमने आमंत्रित किया है तो हम जाने के लिए भी कह रहे हैं। कुलपति के इस व्यवहार से नाराज दर्जनभर अतिथि और कई प्रोफेसर कार्यक्रम बीच में छोड़ बाहर निकल गए। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस तरह का वीडियो तेजी के साथ वायरल हो रहा है।
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गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान बुधवार को बड़ा विवाद हो गया। साहित्य अकादमी, नई दिल्ली और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ” विषय पर कार्यक्रम चल रहा था। कार्यक्रम में भोपाल, महाराष्ट्र, ओडिशा सहित कई राज्यों से साहित्यकार और प्रोफेसर इसमें शामिल हुए थे। कार्यक्रम के बीच कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल अपने जीवन के अनुभव और उपलब्धियों का जिक्र करने लगे। इस पर महाराष्ट्र से आए साहित्यकार मनोज रूपणा ने विनम्रता से कहा कि यदि चर्चा कार्यक्रम के विषय पर केंद्रित हो, तो बेहतर रहेगा।
बस, यहीं से माहौल बिगड़ गया। कुलपति चक्रवाल ने सख्त लहजे में पूछा “आपका नाम क्या है?” नाम बताने पर वे नाराज हो गए और कहा “आपका यहां जरूरत नहीं है, तुरंत बाहर जाइए।” कुलपति ने आगे कहा कि वाइस चांसलर से बात करने का तरीका सीखिए, और आयोजकों को निर्देश दिया कि इन्हें आगे कभी न बुलाया जाए। खुले मंच पर हुई इस नोकझोंक से सभागार का माहौल गर्म हो गया। कई अतिथि असहज हो गए और कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर निकल गए। दूसरे राज्यों से आए साहित्यकारों ने इसे “अनुचित” बताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। अकादमिक मंच पर संवाद की जगह विवाद हावी हो गया।
पूरे वाक्ये में कुलपति आलोक चक्रवाल खुद को सही और मुख्य मुद्दे पर लौटने के लिए कहने वाले अतिथि को ही गलत ठहराते रहे और अतिथि देवों भव: के भारतीय संस्कृति को ठेंगा दिखाते रहे। विवाद के चलते परिसंवाद का फोकस विषय से भटक गया और शेष सत्रों पर भी इसका असर देखा गया। घटना के बाद कैंपस में दिनभर चर्चा चलती रही कि प्रतिष्ठित मंच पर इस तरह का टकराव विश्वविद्यालय की गरिमा के अनुकूल नहीं है।
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रायपुर के अंबेडकर चौक में आज प्रतिवाद सभा
नामचीन लेखक मनोज रुपणा के अपमान को लेकर आज रायपुर के अंबेडकर चौक में प्रतिवाद सभा का आयोजन किया गया है।सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इसकी सूचना तेजी के साथ वायरल हो रहा है। इसमें लिखा है कि कल सात जनवरी को गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार चक्रवाल ने देश के नामचीन लेखक मनोज रुपणा को अपमानित करने का घृणित कृत्य किया है। छत्तीसगढ़ में किसी मेहमान को आमंत्रित कर उसे अपमानित करने की परंपरा इससे पहले कभी नहीं देखी गई। मूल रुप से छत्तीसगढ़ के रहवासी लेखक मनोज रुपणा के अपमान को लेकर देशभर के लेखकों और संस्कृतिकर्मियों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
इस सिलसिले में 8 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ के बुद्धिजीवी, जिम्मेदार नागरिक, लेखक और संस्कृतिकर्मी रायपुर के अंबेडकर चौक में अपना प्रतिवाद दर्ज करने के लिए जुट रहे हैं। इस प्रतिवाद सभा में कुलपति के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा, और उन्हें हटाने की मांग को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। शब्द की सत्ता का सम्मान करने वाले तमाम प्रतिबद्ध साथियों की प्रतिवाद सभा में उपस्थिति अपेक्षित हैं।








