रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदों पर प्रमोशन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। हाल ही में ई संवर्ग के 1478 लेक्चरर्स और हेड मास्टर्स को प्राचार्य पद पर पदोन्नत कर पोस्टिंग दे दी गई, लेकिन इसके बाद भी ई कैडर में लगभग 695 पद अभी खाली हैं।
छह महीने से अधिक चली अदालती प्रक्रिया और उसके बाद विभागीय काउंसलिंग के कारण प्रमोशन में काफी देरी हुई। इसी दौरान 600 से ज्यादा लेक्चरर्स रिटायर हो गए, जिनमें E और T दोनों संवर्ग शामिल है। अब शिक्षा विभाग दिसंबर में अगली प्रमोशन सूची जारी करने की तैयारी में है, जिसमें उन व्याख्याताओं और हेड मास्टर्स के नाम शामिल होंगे जो प्राचार्य बनने की योग्यता पूरी करते हैं।
कैसे अटका प्रमोशन, और क्यों खाली रह गए इतने पद?
पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होते ही मामला हाई कोर्ट पहुंच गया था। सुनवाई लंबी चली और प्रमोशन पर रोक लगी रही।
• टी संवर्ग का विवाद पहले निपटा, और कोर्ट से अनुमति मिलते ही उनके लिए काउंसलिंग पूरी हुई।
• ई संवर्ग का मामला तीन महीने और फंसा रहा, जिससे प्रक्रिया में और देरी हुई।
इस बीच ई और टी संवर्ग के 350 से अधिक व्याख्याता रिटायर हो गए, जिन्हें प्रिंसिपल बनना था। काउंसलिंग के दौरान कई लेक्चरर्स—खासकर वे जिनकी रिटायरमेंट डेट 1–2 महीने में थी , ने स्वेच्छा से प्रिंसिपल पद अस्वीकार कर दिया। ऐसे शिक्षकों की संख्या लगभग 327 बताई जा रही है। अक्टूबर–नवंबर के बीच कुल 368 शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने के बाद ई कैडर में 695 प्राचार्य पद खाली रह गए हैं। शिक्षक संगठनों ने विभाग से आग्रह किया है कि शेष पद जल्द भरे जाएं।
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अगली प्रमोशन सूची अगले महीने संभव
विभागीय सूत्रों के अनुसार दिसंबर में ई और टी दोनों संवर्गों के लिए नई प्रिंसिपल लिस्ट जारी होने की संभावना है। इस सूची में उन शिक्षकों को शामिल किया जाएगा:
• जिनकी योग्यता और सेवा अवधि प्रमोशन मानदंडों के अनुरूप है
• और जिन्होंने पूर्व काउंसलिंग में अनुपस्थित नहीं रहे
नए आदेश का लाभ बड़ी संख्या में शिक्षकों को मिलने की संभावना है।
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कौन किस स्कूल में जाएगा, पोस्टिंग के लिए क्या थे नियम?
प्राचार्य पद के लिए जारी पोस्टिंग में शिक्षा विभाग ने कुछ स्पष्ट प्राथमिकताएँ तय की थीं:
1. पहला नियम: जिस स्कूल में लेक्चरर या हेड मास्टर पहले से पदस्थ थे और वहाँ प्रिंसिपल का पद खाली था, वही उन्हें उसी स्कूल में प्राचार्य बनाया गया।
2. दूसरा नियम:
• जहाँ एक ही स्कूल में नियमित लेक्चरर, शिक्षाकर्मी LB व्याख्याता और हेड मास्टर तीनों पदस्थ थे
• और तीनों प्राचार्य बनने के योग्य भी थे
• वहाँ सबसे पहले नियमित व्याख्याता को उसी स्कूल में पोस्टिंग मिली।
• शेष दो शिक्षकों में जिसका रिटायरमेंट नजदीक था, उसे प्राथमिकता दी गई।
3. दिव्यांग अभ्यर्थी:
• महिला दिव्यांग शिक्षकों को पहली वरीयता
• पुरुष दिव्यांग शिक्षकों को दूसरी वरीयता दी गई।
इन नियमों के आधार पर 1478 पदों की पोस्टिंग प्रक्रिया पूरी की गई।








