बिलासपुर । बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक भर्ती के दौरान गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने तय मापदंड, योग्यता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों को नज़रअंदाज़ कर मनमानी तरीके से चयन प्रक्रिया चलाई। शिकायत में यह भी सामने आया है कि विज्ञान विषय के शिक्षकों के पदों पर कॉमर्स और आर्ट्स पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को चुन लिया गया, जबकि विज्ञान में गोल्डमेडलिस्ट उम्मीदवार को सूची से बाहर कर दिया गया।
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पूरा मामला तब उजागर हुआ जब कामिनी कौशिक ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को लिखित शिकायत भेजी। गंभीर आरोपों को देखते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच कराने के निर्देश दिए। दो प्राचार्यों की जांच समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी, उसमें चयन प्रक्रिया में हुई कई गड़बड़ियां स्पष्ट दर्ज की गई हैं। जिले में जुलाई 2025 में संविदा सहायक शिक्षकों के 191 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था, जिनमें से 55 पद सहायक शिक्षक के थे। शिक्षा विभाग ने पहले 400 उम्मीदवारों की मेरिट सूची जारी की और बाद में 275 उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया। लेकिन अंतिम चयन सूची जारी करते समय बुनियादी योग्यता तक का पालन नहीं किया गया।

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जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि सहायक शिक्षक पद के लिए विज्ञान संकाय से हायर सेकंडरी और डीएड या डीएलएड अनिवार्य योग्यता थी, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों में श्रद्धा परगनिहा और मेंहदी देवांगन ने हायर सेकंडरी परीक्षा कॉमर्स से उत्तीर्ण की थी। दोनों अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन सूची में भी पात्र बताया गया, जबकि वे मूल योग्यता ही पूरी नहीं करते थे। समिति ने इसे गंभीर त्रुटि माना है।

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जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट डीईओ को सौंपते हुए स्पष्ट लिखा कि दोनों अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किया जाना गलत है और नियुक्ति मापदंडों का खुला उल्लंघन है। रिपोर्ट के अनुसार अन्य पदों पर भी इसी तरह की गड़बड़ियों की आशंका है। मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे अनुचित चयन से स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा। जिस विषय के लिए शिक्षक चुने गए हैं, वे उसी विषय में योग्य नहीं हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कलेक्टर से शिकायत के बाद जांच तो पूरी हो गई है, लेकिन अंतिम निर्णय और कार्रवाई का इंतजार है। जिले भर में इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और योग्य अभ्यर्थी न्याय की मांग कर रहे हैं।








