शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता के बाद छत्तीसगढ़ के शिक्षकों व संगठनों के बीच हलचल मच गई है, राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका करेगी।
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रायपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नजर डालें तो शिक्षकों को टेट पास करना अनिवार्य है। इसे लेकर अब छत्तीसगढ़ के विभिन्न कर्मचारी संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। शिक्षक संगठनों के अलावा राजपत्रित अधिकारी संघ आगे आ गया है। डीपीआई से मिलकर टेट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की सलाह दी है। बीते दिनों शालेय शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में संगठन का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी से मिलकर प्रदेश के शिक्षकों के हितों के संरक्षण के साथ ही टेट को लेकर चर्चा की व सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का सुझाव दिया था।

संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय से TET परीक्षा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करने हेतु चर्चा की गई। इस मुद्दे को राजपत्रित अधिकारी संघ की ओर से भी एजेंडा में शामिल किया गया था। अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजपत्रित अधिकारी संघ व प्रांतीय संयोजक, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन कमल वर्मा ने बताया कि उनके अनुरोध पर शासन ने पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत करने के लिए सहमति दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर तीन वर्ष के भीतर TET परीक्षा उत्तीर्ण करने हेतु एक ठोस एवं स्पष्ट नीति बनाने का अनुरोध भी किया गया, ताकि भविष्य में शिक्षकों की सेवा संबंधी किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। संचालक ने इस मुद्दे पर सहमति व्यक्त की है।

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विभागाध्यक्ष स्तर पर संयुक्त परामर्शदात्री समिति की बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा

  • प्रदेश के राजपत्रित अधिकारियों का गोपनीय प्रतिवेदन, अचल संपत्ति विवरण ऑनलाइन की जाए, ताकि समय पर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान का लाभ मिल सके।
  • विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक जनवरी में अनिवार्यता कराई जाए तथा प्रत्येक वर्ष नियमित रूप से आयोजित की जाए।
  • विभागीय जांच के लंबित प्रकरणों को शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा एक वर्ष की समय-सीमा का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • राजपत्रित भर्ती नियमों के सेट-अप को पुनरीक्षित करते हुए, अन्य विभागों की भांति उसमें एकरूपता लाई जाए।
  • गैर राज्य स्तरीय प्रशिक्षित स्नातकोत्तर शिक्षक (एल.बी.) प्रधान पाठक प्रा. शा. (एल.बी.) एवं शिक्षक नियमित टी. संवर्ग का 01 अप्रैल 2023 की स्थिति में जारी अंतिम वरिष्ठता सूची में व्याख्याता पदोन्नति हेतु प्रतीक्षा सूची जारी कर तत्काल पदोन्नति हेतु डी.पी.सी. कराई जाए। डीपीसी. 8 से 12 दिसम्बर के बीच रखने हेतु निर्देश जारी किया गया था। कृपया इस संबंध में की गई कार्यवाही से अवगत कराया जाए।
  • पदोन्नत्ति के लिए सीमित भर्ती का आयोजन शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019 के अनुसूची 2 के सरल कमांक 18 में 10 प्रतिशत पदों पर सीमित भर्ती परीक्षा के माध्यम से चयन किये जाने का उल्लेख है, इसका पालन करते हुए सीमित भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जाए।
  • वर्ष 2012 से पूर्व से पदस्थ शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्यता के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यता आदेश के विरूद्व छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी अन्य राज्यों की भांति पुनर्विचार याचिका दायर की जाए।
  • विभाग में शिक्षक ई. संवर्ग (एल.बी.) के पद पर लगभग 15 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को भर्ती नियम में प्रावधान अनुसार व्याख्याता के पद पर यथाशीघ्र पदोन्नति हेतु डी.पी.सी. कराई जाए। लेख है कि विभाग द्वारा शिक्षक ई. संवर्ग (एल.बी.) के पदों पर कार्यरत शिक्षकों की व्याख्याता पद पर पदोन्नति हेतु गोपनीय एवं अचल संपत्ति संबंधी जानकारी मंगा ली गई है।

शालेय शिक्षक संघ ने शिक्षा सचिव से मिलकर पुनर्विचार याचिका दायर करने दिया सुझाव

टेट की अनिवार्यता और शिक्षकों के बीच दौड़ती चिंता की लहर के बीच शालेय शिक्षक संघ ने पहल करना प्रारंभ किया है। शिक्षा सचिव से मिलकर पुनर्विचार याचिका दायर करने का सुझाव दिया है। शिक्षक संघ ने शिक्षा सचिव से कहा कि विभागीय TET, अनुकूल पाठ्यक्रम और दो साल के भीतर 6 परीक्षा आयोजित करने के मॉड्यूल संबंधी मुद्दों को सामने रखकर याचिका में अपनी बातों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की बात कही है। शालेय शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में संगठन का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी से मिलकर प्रदेश के शिक्षकों के हितों के संरक्षण हेतु विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की व ज्ञापन सौंपा। संगठन के महासचिव धर्मेश शर्मा ने बताया कि शालेय शिक्षक संघ सदैव शिक्षकों की समस्याओं के उचित समाधान हेतु तत्पर रहता है इसी सिलसिले में आज शिक्षासचिव से मिलकर प्रदेश के शिक्षकों में सुप्रीम कोर्ट निर्णय पश्चात TET की अनिवार्यता को लेकर बड़ी चिंता देखी जा रही है, जिसके समुचित समाधान हेतु हमने सबसे पहले विभाग द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करने अनुरोध किया, और यदि परीक्षा आवश्यक हुआ तो NCTE के पाठ्यक्रम की समीक्षा करते हुए शिक्षकों के अनुकूल पाठ्यक्रम का निर्धारण कर 2 साल के भीतर 6 विभागीय TET परीक्षा आयोजित करने का सुझाव दिया है। इसके लिए विभाग द्वारा ऑनलाइन क्लास व प्रशिक्षण की भी मांग की गई। शिक्षासचिव ने इन सुझावों पर रुचि लेते हुए परीक्षण करने व शिक्षक हितों को ध्यान रखने का आश्वासन दिया।

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शिक्षकों का ना हो अहित, निकाले बीच का रास्ता

शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने मांग किया कि प्रदेश के कार्यरत शिक्षकों का अहित न हो,ऐसा रास्ता शिक्षा विभाग जरूर निकाले। वैसे भी युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में सरकार की मंशानुरूप कार्य नही हो पाया। जिस शिक्षा गुणवत्ता को स्थापित करने शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय शाला में शिक्षक उपलब्ध कराने का लक्ष्य लिया गया था इसके विपरीत विभागीय अनियमितताओं के चलते अनियंत्रित ढंग से शिक्षकों को जबरदस्ती अतिशेष बनाकर इससे होने वाले दूरगामी परिणामो की अनदेखी कर युक्तियुक्तकरण किया गया वह प्रदेश की शालाओं में अफरा तफरी का माहौल बना दिया, जिसकी चपेट में हजारों शिक्षक परिवार आया और उन्हें परेशानियां भुगतना पड़ रहा। निचले स्तर में इस प्रक्रिया में लगे अधिकारी कर्मचारियों ने अपने तथाकथित चहेतों के लिए नियमो को ताक में रखकर उन्हें बचा लिया जबकि हजारों शिक्षकों की समस्याओं की सुनवाई आज पर्यंत नही हुई।उनके अभ्यावेदन जिला,संभाग या DPI में धूल खाते हुए अब पड़े हैं।


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