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CG Teacher News: अटैचमेंट पर रोक के बाद भी 6 महीने से समग्र शिक्षा में जमे प्राचार्य, ‘देशपांडे प्रेम’ पर उठे सवाल

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CG Teacher News: रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) एक ओर शिक्षकों पर नियमों के पालन को लेकर सख्ती दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समग्र शिक्षा कार्यालय में एक प्राचार्य की पदस्थापना को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। अटैचमेंट समाप्त करने के सरकारी निर्देशों के बावजूद प्राचार्य अजय देशपांडे के समग्र शिक्षा कार्यालय में बने रहने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

आदेश कुछ और, जमीनी हकीकत कुछ और

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स्कूल शिक्षा विभाग लगातार अनुशासन, पारदर्शिता और जीरो टॉलरेंस की बात कर रहा है। युक्तियुक्तकरण, उपस्थिति, पदस्थापना और अनधिकृत अनुपस्थिति जैसे मामलों में कार्रवाई भी की जा रही है। लेकिन समग्र शिक्षा कार्यालय में एक प्राचार्य की लगातार मौजूदगी ने विभाग के दोहरे मापदंडों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार व्याख्याता से पदोन्नत होकर प्राचार्य बने अजय देशपांडे की नियमित पदस्थापना स्कूल में की गई थी। बताया जा रहा है कि कार्यभार ग्रहण करने के कुछ घंटों बाद ही उन्हें पुनः समग्र शिक्षा कार्यालय में कार्य के लिए भेज दिया गया और तब से वे वहीं सेवाएं दे रहे हैं।

स्कूल में पदस्थापना, लेकिन सेवा समग्र शिक्षा में

मामले को लेकर शिक्षा जगत में चर्चा है कि प्राचार्य पद पर पदस्थापना के बाद भी अजय देशपांडे का अधिकांश समय समग्र शिक्षा कार्यालय में ही बीत रहा है। इस बीच उनके मूल विद्यालय में नियमित प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से भी उन्हें मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने के लिए पत्राचार किया गया था, लेकिन अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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अटैचमेंट खत्म करने के सरकारी आदेश का हवाला

विवाद का प्रमुख कारण राज्य सरकार की वह नीति है जिसमें विभिन्न विभागों में अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया गया था स्थानांतरण नीति और शासन के निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि विभागों में लंबे समय से चल रहे अटैचमेंट समाप्त किए जाएं और अधिकारी-कर्मचारी अपने मूल पदस्थापना स्थल पर कार्य करें। इसी आधार पर सवाल उठ रहे हैं कि जब अन्य कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, तो इस मामले में अलग व्यवस्था क्यों लागू है।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी नहीं बदली स्थिति

मामले के सार्वजनिक होने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा प्राचार्य को उनके विद्यालय भेजे जाने का आश्वासन दिए जाने की भी चर्चा रही। हालांकि कई दिनों बाद भी स्थिति यथावत रहने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि अटैचमेंट समाप्त करने का निर्णय नीति स्तर पर लिया गया है तो उसका पालन सभी मामलों में समान रूप से होना चाहिए।

शिक्षकों के बीच उठ रहे सवाल

शिक्षक संगठनों और शिक्षा जगत में यह सवाल उठ रहा है कि जब मामूली प्रशासनिक चूक पर कार्रवाई की जा रही है, तब लंबे समय से जारी इस व्यवस्था पर विभागीय स्तर पर स्पष्ट निर्णय क्यों नहीं लिया जा रहा। शिक्षकों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त दायित्व दिया जाता है तो उसकी स्पष्ट प्रशासनिक वैधता और अवधि भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

चर्चा का विषय बना मामला

वर्तमान में यह मामला शिक्षा विभाग के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय हलकों में यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है कि अटैचमेंट समाप्त करने के सरकारी निर्णय और जमीनी स्तर पर उसकी वास्तविक स्थिति में आखिर इतना अंतर क्यों दिखाई दे रहा है। अब नजर इस बात पर है कि विभाग इस मामले में कोई स्पष्ट आदेश जारी करता है या फिर यह विवाद आगे और बढ़ता है।


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