CG Teacher News: बिलासपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश ने बिलासपुर के शिक्षा जगत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। लेक्चरर (एलबी) से महज छह महीने पहले प्राचार्य पद पर पदोन्नत हुए रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बनाए जाने के बाद वरिष्ठ प्राचार्यों में भारी नाराजगी है। प्राचार्य कल्याण संघ ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए राज्यपाल को हस्तक्षेप के लिए पत्र भेजा है।

प्रभारी डीईओ की नियुक्ति पर उठा विवाद
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे के स्थान पर प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल को प्रभारी डीईओ का दायित्व सौंपा गया है। नियुक्ति के बाद जिले के वरिष्ठ प्राचार्यों और प्राचार्य कल्याण संघ ने इसका खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। संघ का आरोप है कि रामेश्वर जायसवाल को प्राचार्य पद पर पदोन्नत हुए अभी मात्र छह माह हुए हैं, जबकि जिले में ऐसे कई प्राचार्य कार्यरत हैं जिन्हें 14 से 18 वर्ष तक की वरिष्ठता प्राप्त है। इसके बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर कनिष्ठ अधिकारी को प्रभारी डीईओ बनाया गया है।
राज्यपाल को भेजा गया विरोध पत्र
प्राचार्य कल्याण संघ ने राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा है कि यह नियुक्ति सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और वरिष्ठता संबंधी नियमों के विपरीत है। संघ ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप कर आदेश की समीक्षा कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि संवेदनशील और बड़े जिले बिलासपुर में प्रभारी डीईओ की नियुक्ति वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए थी।
जीएडी के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
प्राचार्य कल्याण संघ ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 14 जुलाई 2014 को जारी निर्देशों और पूर्व के परिपत्रों में स्पष्ट किया गया है कि अतिरिक्त प्रभार या प्रभारी पदों की नियुक्ति में वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संघ ने आरोप लगाया है कि विभाग ने इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए कनिष्ठ प्राचार्य को प्रभारी डीईओ का दायित्व सौंप दिया है।
हाई कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
संघ ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक पूर्व निर्णय का भी उल्लेख किया है। पत्र में कहा गया है कि न्यायालय पहले भी वरिष्ठता की अनदेखी कर किए गए प्रभार संबंधी आदेशों को अवैध ठहरा चुका है। इसी आधार पर संघ ने वर्तमान आदेश को भी नियम विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की मांग की है।
वरिष्ठ प्राचार्यों में बढ़ रहा असंतोष
प्राचार्य कल्याण संघ का कहना है कि बिलासपुर जिले में लंबे अनुभव और उच्च वरिष्ठता वाले अनेक प्राचार्य कार्यरत हैं। ऐसे में मात्र छह माह की वरिष्ठता वाले अधिकारी को जिले का प्रभारी डीईओ बनाए जाने से वरिष्ठ अधिकारियों में असंतोष और नाराजगी बढ़ गई है। संघ ने इसे प्रशासनिक परंपराओं और सेवा नियमों के विपरीत बताया है।
कोर्ट जाने की तैयारी
विवाद बढ़ने के साथ ही अब मामला न्यायालय तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है। संघ से जुड़े पदाधिकारी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। यदि शासन स्तर पर निर्णय की समीक्षा नहीं होती है, तो वरिष्ठ प्राचार्य हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
क्या है विवाद का केंद्र?
- रामेश्वर जायसवाल को लगभग 6 माह पहले ही प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिली।
- उन्हें बिलासपुर जिले का प्रभारी डीईओ नियुक्त किया गया।
- कई वरिष्ठ प्राचार्यों को दरकिनार करने का आरोप।
- प्राचार्य कल्याण संघ ने राज्यपाल को भेजा विरोध पत्र।
- जीएडी के वरिष्ठता संबंधी निर्देशों के उल्लंघन का दावा।
- मामला न्यायालय तक पहुंचने की संभावना।