CG News: GAD की नई बंदिश, अब विधायक अपनी पसंद के सरकारी बाबू को नहीं करा पाएंगे अटैच, जारी हुआ आदेश

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CG News: रायपुर। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधायकों के लिए लागू सचिवालयीन एवं लिपिकीय सहायता संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अब मंत्रालय, विभागाध्यक्ष कार्यालयों और अन्य राज्य स्तरीय संस्थानों में पदस्थ कर्मचारियों को विधायकों के साथ अटैच नहीं किया जा सकेगा। जीएडी ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर संशोधित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

अब नहीं चलेगी पसंदीदा कर्मचारी की व्यवस्था

अब तक कई विधायक अपनी सुविधा और कार्यप्रणाली के अनुसार विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को लिपिकीय सहायता के लिए अपने साथ अटैच कराते थे। नए नियम लागू होने के बाद यह व्यवस्था सीमित कर दी गई है। संशोधित आदेश के अनुसार विधायक राज्य के किसी भी जिले में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं लिपिकीय सहायता के लिए ले सकेंगे, लेकिन राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों को उनके साथ अटैच नहीं किया जा सकेगा।

सांसदों को मिली छूट

जीएडी के नए आदेश में सांसदों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। सांसद पहले की तरह राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं सचिवालयीन एवं लिपिकीय सहायता के लिए प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रकार यह नया प्रतिबंध केवल विधायकों पर लागू होगा।

2019 के आदेश में किया गया संशोधन

सामान्य प्रशासन विभाग ने 20 अगस्त 2019 को जारी समेकित निर्देशों के बिंदु क्रमांक-7 में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू की है।सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य स्तरीय कार्यालयों में कर्मचारियों की उपलब्धता बनी रहेगी और प्रशासनिक कार्यों पर अनावश्यक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

जीएडी ने आदेश में क्या कहा?

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के सांसदों एवं विधायकों को सचिवालयीन सहायता उपलब्ध कराने संबंधी पूर्व में जारी निर्देशों में आंशिक संशोधन किया गया है।

संशोधित प्रावधान के तहत:

  • विधायक राज्य के किसी भी जिले में पदस्थ कर्मचारियों की सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे।
  • राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों को विधायक के साथ अटैच नहीं किया जा सकेगा।
  • सांसदों के मामलों में यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की कवायद

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे मंत्रालय और राज्य स्तरीय कार्यालयों में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा नियमित प्रशासनिक कार्यों में बाधा नहीं आएगी।


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