आरक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप, नियुक्ति पत्र जारी करने पर हाई कोर्ट की रोक

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। सिंगल बेंच जस्टिस पीपी साहू ने मामले की सुनवाई के बाद अगली सुनवाई तक आरक्षक भर्ती के तहत नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य शासन और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया है।

याचिकाकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

आरक्षक भर्ती में गड़बड़ी की जांच की मांग को लेकर बिलासपुर, सक्ती, रायगढ़ और मुंगेली जिलों के मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीक़ी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2023 में लगभग 6000 पदों पर आरक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट का डेटा रिकॉर्ड करने का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था। आरोप है कि कंपनी के स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा कई अभ्यर्थियों को पैसों के लेन-देन के माध्यम से अनुचित लाभ दिया गया।

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सरकारी रिपोर्ट में भी अनियमितताओं की पुष्टि

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीक़ी ने कोर्ट को बताया कि शासन द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट में स्वयं जिला बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक ने फिजिकल टेस्ट के दौरान गड़बड़ियों और गलत डेटा एंट्री की बात स्वीकार की है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कई स्थानों पर CCTV फुटेज डिलीट किए गए। सरकारी जांच में कुल 129 ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान हुई है, जिन्हें नियमों के विपरीत अतिरिक्त अंक देकर अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

भर्ती नियमों के उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ताओं ने पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम-7 का हवाला देते हुए कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर नई प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इसके बावजूद चयन प्रक्रिया को पूरा कर अंतिम सूची जारी करना और नियुक्ति आदेश जारी करने की तैयारी नियमों के विरुद्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि लंबी कूद और भाला फेंक जैसे फिजिकल टेस्ट में रिकॉर्ड के साथ गंभीर छेड़छाड़ की गई है और यह गड़बड़ी केवल एक जिले तक सीमित न होकर कई जिलों में पाई गई है।

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हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरक्षक भर्ती के तहत नियुक्ति पत्र जारी करने पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य शासन और गृह विभाग को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद आरक्षक भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल अस्थायी विराम लग गया है और अब मामले की अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।


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