LIVE
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा फैसला जनता करती है और इस बार जनता ने पूरे दम के साथ NDA के नाम पर 200 से ज्यादा सीटें सौंपकर यह बता दिया कि हवा किस दिशा में बह रही है। ताज़ा रुझानों के मुताबिक, नीतीश कुमार की पार्टी JDU, बीजेपी से भी आगे निकलती दिखाई दे रही है। 243 सीटों वाली विधानसभा में यदि JDU सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर आती है, तब भी यह किसी को चौंकाने वाला नहीं होगा—क्योंकि इस पूरे चुनाव का केंद्रबिंदु शुरुआत से ही नीतीश कुमार ही थे।
बिहार की राजनीति में नीतीश का ‘अडिग’ दबदबा क्यों कायम है?
नीतीश कुमार की ताकत केवल सीटों में नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक इंजीनियरिंग में छिपी है। उन्होंने जिस अनोखे समीकरण को अपनाया—
- अतिपिछड़े वर्ग (EBC),
- महादलित समूह,
- गैर-यादव OBC को एक मंच पर लाने का जो काम किया, वही उनका सबसे बड़ा वोट-बैंक बन गया।
Also Read – BIHAR ELECTION RESULT LIVE: किसकी बनेगी सरकार?
सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि
- 2010 में JDU पहली पार्टी,
- 2015 में दूसरे नंबर की पार्टी,
- 2020 में तीसरे नंबर की पार्टी बनी
लेकिन हर बार मुख्यमंत्री नीतीश ही बने। यानी उनकी सीटें बदल सकती हैं, लेकिन सत्ता में उनकी केंद्रीय भूमिका कभी नहीं बदलती। इस बार भी JDU की दमदार वापसी बता रही है कि नीतीश कुमार की पकड़ गांव-गांव में अब भी मजबूत है, खासकर महिलाओं में उनकी खास लोकप्रियता दो दशक से बनी हुई है।
चिराग पासवान: इस बार की लड़ाई के ‘नए स्टार’
LJP (RV) का प्रदर्शन भी इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी बन गया है। 29 में से 20 से ज्यादा सीटों पर बढ़त हासिल कर चिराग पासवान ने आलोचकों को गलत साबित कर दिया है। कई लोग कहते थे कि NDA ने सीट बंटवारे में चिराग को जरूरत से ज़्यादा हिस्सेदारी दी है, लेकिन नतीजे बताते हैं कि चिराग ने सबसे बेहतर स्ट्राइक रेट देकर अपनी पहचान साबित कर दी।
उनकी वापसी से NDA को
- 5–6% पासवान/दलित वोट,
- जो पहले बिखरा हुआ था, दुबारा एकजुट मिला है।
यह वोट बैंक JDU की मजबूती का एक बड़ा कारण भी बना है।
चिराग का यह प्रदर्शन
- NDA में उनकी पकड़ बढ़ाएगा,
- भविष्य की राजनीति में उनका कद बड़ा करेगा,
- और “पोस्ट-नीतीश बिहार” के संभावित नेतृत्वकर्ताओं में उन्हें प्रमुख स्थान दिला देगा।
NDA की 200+ सीटों के असली कारक
- नीतीश की महिला वोटर पकड़
- EBC–Mahadalit–OBC गठजोड़
- चिराग पासवान का मजबूत प्रदर्शन
- BJP + JDU + LJP(RV) का समीकरण
- विपक्ष की कमजोर तैयारी
- मतदाताओं का स्थिरता की ओर झुकाव



























