Bilaspur High Court: बिलासपुर। आवारा कुत्तों के हमलों और काटने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई किए जाने के बीच छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में भी एक गंभीर याचिका दाखिल हुई है। याचिकाकर्ता पिता ने अदालत को बताया है कि उसके बेटे की मौत कुत्ते के काटने के कारण हुई है। बेटे की मौत के बाद पिता ने राज्य शासन से क्षतिपूर्ति राशि दिलाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका ने राज्य सरकार को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है कि आखिर किस कानून या नियम के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तारीख तय की है।
यह मामला जस्टिस एनके व्यास की वेकेशन बेंच में सुनवाई के लिए आया। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता ने अदालत को बताया कि कुत्ते के काटने से मौत की स्थिति में मुआवजा देने का कोई स्पष्ट प्रावधान शासन के पास नहीं है। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं, सांप-बिच्छू के काटने तथा जंगली जानवरों के हमले में मौत या गंभीर चोट की स्थिति में राहत राशि का प्रावधान किया है।
इसी वजह से हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा जवाब
आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई कर रहा है। शीर्ष अदालत ने सभी हाई कोर्ट को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं और नियमित रिपोर्ट भी तलब की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले और उसकी सख्त टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी पूछा है कि किन नियमों या कानूनी प्रावधानों के आधार पर याचिकाकर्ता को राहत दी जा सकती है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
धीरज पारधी ने बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उसके बेटे की मौत कुत्ते के काटने के कारण हुई थी। याचिकाकर्ता ने बेटे की मौत पर चार लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने की मांग की है। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि कुत्ते के काटने से मौत होने पर मुआवजा देने का कोई नियम फिलहाल लागू नहीं है। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने मुख्य सचिव को शपथ पत्र सहित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों के नियंत्रण और प्रबंधन को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के पालन की जानकारी भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी।
पढ़िए क्या है राहत सहायता का प्रावधान?
- प्राकृतिक आपदा, नदी-तालाब-बांध-कुएं या नहर में डूबने, सांप, बिच्छू, गुहेरा अथवा मधुमक्खी के काटने, नाव दुर्घटना, आग से जलने, रसोई गैस सिलेंडर या स्टोव फटने, खदान धंसने, लू लगने, आकाशीय बिजली, आंधी-तूफान, अतिवृष्टि, बाढ़ अथवा पेड़/डंगाल गिरने या बिजली प्रवाह से मौत होने की स्थिति में मृतक के निकटतम वारिस को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता कलेक्टर द्वारा स्वीकृत की जाती है। इसमें बच्चे की मृत्यु भी शामिल मानी जाती है।
- यदि एक ही परिवार में एक से अधिक लोगों की मृत्यु होती है, तो प्रत्येक मृतक के हिसाब से अलग-अलग सहायता राशि देय होती है। इसके लिए संबंधित एसडीएम, तहसीलदार या नायब तहसीलदार घटनास्थल पहुंचकर जांच करते हैं और डॉक्टर से परीक्षण भी कराया जाता है।
- यदि राज्य का कोई व्यक्ति अपने गृह जिले के अलावा किसी अन्य जिले में प्राकृतिक आपदा का शिकार होकर मौत का शिकार होता है, तो उसके मूल गृह जिले से सहायता राशि स्वीकृत की जाती है।
- राहत एवं बचाव कार्य में लगे अधिकारी-कर्मचारियों की आपदा के दौरान मौत होने पर उनके परिवार को भी सहायता अनुदान देने का प्रावधान है।
- राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं होने पर संबंधित राज्य से रिपोर्ट प्राप्त कर मृतक के गृह जिले में अनुदान राशि स्वीकृत की जाती है।
- ऐसे भारतीय नागरिक जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता ले ली है, उन्हें राज्य में आपदा से मौत होने पर यह आर्थिक सहायता नहीं दी जाती।
- किसी विदेशी नागरिक की राज्य में उपरोक्त प्राकृतिक आपदाओं के कारण मृत्यु होने पर भी आर्थिक सहायता राशि का प्रावधान लागू नहीं होता।