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Bilaspur High Court: गाय-बछड़ा हत्या केस में 52 दिनों से जेल में बंद 3 कोरवा आदिवासियों को जमानत

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Bilaspur High Court: बिलासपुर। उत्तर छत्तीसगढ़ के तीन कोरवा आदिवासी बीते एक महीने 22 दिनों से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थे। जमानत आवेदन पर सुनवाई के बाद बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने जरूरी शर्तों के साथ तीनों आरोपियों को राहत देते हुए रिहाई का आदेश पारित किया है। कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

जमहिर कोरवा, दीपक राम और लालसाई कोरवा ने अपने अधिवक्ता चितेंद्र सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने तीनों याचिकाकर्ताओं को सशर्त जमानत देने का आदेश जारी कर दिया। बता दें कि आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में वर्चुअल पैरवी की थी।

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जानिए पूरा मामला क्या है?

मामले के अनुसार आवेदकों ने कच्छर गांव से 2500 रुपये में एक गाय और उसके बछड़े को खरीदा था। इसके बाद वे दोनों जानवरों को चौरपानी गांव स्थित गढ़मुता पहाड़ी की एक गुफा में ले गए, जहां हंसिया से मारकर उनका मांस खाने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कथन और जांच के आधार पर धौरपुर थाना में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 325, 3(5), छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत अपराध दर्ज किया। इसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर 06 अप्रैल 2026 को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

बचाव पक्ष ने कोर्ट में कहा- झूठा फंसाया गया

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याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि तीनों आरोपी निर्दोष हैं और उन्हें गलत तरीके से इस प्रकरण में फंसाया गया है। अधिवक्ता ने कहा कि कथित गाय और बछड़े के शव की न तो कोई जब्ती हुई है और न ही कोई बरामदगी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मामले में चार्जशीट पेश की जा चुकी है और तीनों 06 अप्रैल 2026 से जेल में हैं। साथ ही ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए जमानत देने का अनुरोध किया गया। वहीं राज्य शासन की ओर से जमानत आवेदन का विरोध करते हुए कहा गया कि मामले में सक्षम अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

हाई कोर्ट ने इन आधारों पर दी राहत

मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपों की प्रकृति, गाय और बछड़े के शव की कोई जब्ती या बरामदगी नहीं होना, आरोपियों का 06 अप्रैल 2026 से जेल में होना, चार्जशीट दाखिल हो जाना और ट्रायल में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए आवेदक जमानत पाने के पात्र हैं। इसी आधार पर अदालत ने जमानत आवेदन स्वीकार करते हुए सशर्त रिहाई का आदेश दिया।

जमानत मिलने के बाद इन नियमों का करना होगा पालन

  • आवेदकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जब गवाह अदालत में उपस्थित हों, तब वे साक्ष्य की तारीखों पर अनावश्यक स्थगन की मांग नहीं करेंगे। यदि ऐसा किया गया तो निचली अदालत इसे जमानत का दुरुपयोग मानते हुए कार्रवाई कर सकती है।
  • सभी आवेदकों को हर निर्धारित तारीख पर स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से निचली अदालत में उपस्थित होना होगा। बिना पर्याप्त कारण अनुपस्थित रहने पर अदालत भारतीय न्याय संहिता की धारा 269 के तहत कार्यवाही कर सकती है।
  • यदि जमानत का दुरुपयोग किया गया और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बीएनएसएस की धारा 84 के तहत उद्घोषणा जारी होने के बाद भी वे अदालत में उपस्थित नहीं होते हैं, तो ट्रायल कोर्ट उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 209 के तहत कार्रवाई शुरू कर सकेगी।
  • ट्रायल की शुरुआत, आरोप तय होने और बीएनएसएस की धारा 351 के तहत बयान दर्ज कराने की तारीखों पर आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहना होगा। यदि अदालत को अनुपस्थिति जानबूझकर या बिना पर्याप्त कारण की लगती है, तो इसे जमानत की शर्तों का उल्लंघन मानते हुए कानूनन कार्रवाई की जा सकेगी। हाई कोर्ट ने आदेश की प्रमाणित प्रति ट्रायल कोर्ट को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।


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