Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड को बिलासपुर हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड द्वारा 11 जून 2026 को जारी उस आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें प्रदेशभर के दरगाहों, उर्स और मजहबी जलसों में डीजे, धूमाल, नाच-गाना और आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया गया था।
वक्फ बोर्ड ने जारी किया था सख्त फरमान
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा जारी आदेश में धार्मिक आयोजनों के दौरान डीजे, धूमाल, आतिशबाजी और नाच-गाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में यह भी कहा गया था कि नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित कमेटी पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर कमेटी को भंग भी किया जा सकता है। इस आदेश के बाद प्रदेशभर में विभिन्न धार्मिक संगठनों और समितियों के बीच चर्चा शुरू हो गई थी।
सूफी इस्लामिक बोर्ड ने हाई कोर्ट में दी चुनौती
वक्फ बोर्ड के आदेश को चुनौती देते हुए सूफी इस्लामिक बोर्ड ने अधिवक्ता देवेंद्र प्रताप सिंह के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वक्फ बोर्ड ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह आदेश जारी किया है। याचिका में कहा गया कि वक्फ बोर्ड को इस प्रकार के प्रतिबंधात्मक निर्देश जारी करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
हाई कोर्ट ने आदेश पर लगाई रोक
मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के तर्कों पर विचार करते हुए कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय माना। हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए वक्फ बोर्ड के 11 जून 2026 के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। फिलहाल कोर्ट के अगले आदेश तक डीजे, धूमाल और आतिशबाजी पर प्रतिबंध संबंधी वक्फ बोर्ड का फरमान लागू नहीं रहेगा।
क्या है मामला?
- 11 जून 2026 को वक्फ बोर्ड ने आदेश जारी किया था।
- दरगाह, उर्स और मजहबी जलसों में डीजे, धूमाल, नाच-गाना और आतिशबाजी पर रोक लगाई गई थी।
- उल्लंघन पर 50 हजार रुपये जुर्माना और कमेटी भंग करने की चेतावनी दी गई थी।
- सूफी इस्लामिक बोर्ड ने आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
- बिलासपुर हाई कोर्ट ने फिलहाल आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।