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Bilaspur High Court News: कर्ज की वसूली के लिए फोन करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, 12 साल पुराने मामले में हाई कोर्ट ने रद्द की 7 साल की सजा

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Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को दिए गए उधार पैसे वापस मांगना या भुगतान नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देना आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आता। जस्टिस रजनी दुबे की सिंगल बेंच ने 12 साल पुराने मामले में आरोपी ठेकेदार को राहत देते हुए सात साल की सजा रद्द कर दी और उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

12 साल पुराने आत्महत्या मामले में आया फैसला

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मामला धमतरी जिले के ग्राम बलियारा का है। वर्ष 2014 में तत्कालीन सरपंच बलराम मंडावी का शव खेत में मिला था। जांच में सामने आया कि उन्होंने कीटनाशक सेवन कर आत्महत्या की थी। मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में ठेकेदार अशोक कुमार वाधवानी का नाम लिखा गया था।

परिजनों ने आरोप लगाया था कि नरेगा चौपाल निर्माण के लिए लिए गए सामान के बदले आरोपी लगातार अधिक रकम और ब्याज की मांग कर रहा था तथा दबाव बना रहा था। मामले में विशेष अदालत ने आरोपी को एससी-एसटी एक्ट से बरी करते हुए आईपीसी की धारा 306 के तहत सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।

दोनों पक्ष पहुंचे थे हाई कोर्ट

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ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोनों पक्षों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। आरोपी ने अपनी सजा निरस्त करने की मांग की, जबकि मृतक के परिजनों ने सजा बढ़ाने और एससी-एसटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की मांग की। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने गवाहों के बयान, सुसाइड नोट और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने मृतक को उसकी जनजातीय पहचान के आधार पर प्रताड़ित किया या अपमानित किया था। अदालत ने माना कि पूरा विवाद आर्थिक लेन-देन से जुड़ा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी लेनदार द्वारा अपने पैसे वापस मांगने के लिए बार-बार संपर्क करना उसका वैध अधिकार है। केवल इस आधार पर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

बैंक कर्ज और आर्थिक तनाव भी बना कारण

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि मृतक ने ट्रैक्टर खरीदने के लिए बैंक से बड़ा ऋण लिया था। किस्तें जमा नहीं होने पर बैंक ने ट्रैक्टर जब्त कर नीलाम कर दिया था। सुसाइड नोट में भी बैंक के बकाया ऋण का उल्लेख था। हाई कोर्ट ने माना कि आर्थिक संकट, कर्ज का दबाव और ट्रैक्टर की नीलामी से उत्पन्न मानसिक तनाव भी आत्महत्या की बड़ी वजह हो सकती है।

सजा रद्द, आरोपी बरी

हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के आवश्यक कानूनी तत्व साबित करने में असफल रहा है। इसके साथ ही आरोपी अशोक कुमार वाधवानी की सात वर्ष की सजा रद्द करते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं मृतक के परिजनों द्वारा सजा बढ़ाने और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग वाली अपील भी खारिज कर दी गई।


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