Bilaspur High Court News: बिलासपुर। विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने पाटन विधानसभा सीट से निर्वाचित भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल ने चुनाव आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया था। हाई कोर्ट ने अब इस मामले में मेरिट के आधार पर सुनवाई का फैसला किया है।
पढ़िए क्या है पूरा मामला?
विजय बघेल ने अपनी चुनाव याचिका में आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार समाप्त होने के बाद लागू मौन अवधि (Silent Period) में भूपेश बघेल ने अपने समर्थकों के साथ पाटन क्षेत्र में रोड शो और रैली की थी। आरोप है कि इस दौरान चुनावी नारे लगाए गए और मतदाताओं से वोट मांगे गए, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन है। याचिका में इस संबंध में वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है।
पहले भी खारिज हो चुकी है आपत्ति
मामले की सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। उनके पक्ष की ओर से 16 बिंदुओं पर आपत्तियां प्रस्तुत करते हुए कहा गया था कि याचिका में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष और ठोस साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने पहले भी इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा था कि याचिका सुनवाई योग्य है और मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से क्या दिया गया तर्क?
भूपेश बघेल की ओर से अदालत में कहा गया कि विजय बघेल की याचिका अस्पष्ट है और आवश्यक तथ्यों का अभाव है। याचिका के साथ प्रस्तुत वीडियो और ई-मेल रिकॉर्ड के समर्थन में भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत आवश्यक प्रमाण-पत्र संलग्न नहीं किया गया है। यह भी कहा गया कि कथित रोड शो में शामिल व्यक्तियों की पहचान तथा भूपेश बघेल की सहमति या भूमिका संबंधी कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है, इसलिए याचिका को बिना ट्रायल के ही निरस्त किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिका में वर्णित तथ्य प्रथम दृष्टया सुनवाई के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैधता, 65-बी प्रमाण-पत्र, गवाहों की विश्वसनीयता और अन्य साक्ष्यों की प्रमाणिकता जैसे मुद्दों का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाएगा, न कि प्रारंभिक स्तर पर।
23 जून से प्रतिदिन होगी सुनवाई
हाई कोर्ट ने भूपेश बघेल की आपत्तियों को खारिज करते हुए आदेश दिया है कि चुनाव याचिका पर 23 जून 2026 से नियमित ट्रायल शुरू किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि मामले की प्रतिदिन सुनवाई होगी और दोनों पक्षों को अपने साक्ष्य एवं गवाह प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दी थी नई अर्जी लगाने की छूट
इससे पहले हाई कोर्ट द्वारा एक अन्य आवेदन खारिज किए जाने के बाद भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट में याचिका की मेंटेनेबिलिटी को लेकर नए सिरे से आवेदन पेश करने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर दायर आवेदन को अब हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रायल के दौरान भूपेश बघेल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की वैधता को लेकर अपनी आपत्तियां उठाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।
अब आगे क्या?
23 जून से शुरू होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य पेश करेंगे। ट्रायल के बाद ही अदालत यह तय करेगी कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं या नहीं तथा उनका चुनाव परिणाम पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं।