Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। बिलासपुर की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति को पुलिस ने बांग्लादेशी बताकर भारत से डिपोर्ट कर दिया, लेकिन वह आज तक न तो बांग्लादेश पहुंचे और न ही परिवार के पास लौटे। पति के लापता होने पर पत्नी ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर कर उन्हें सुरक्षित अदालत के समक्ष पेश करने की मांग की है।
पत्नी का आरोप- पति को डिपोर्ट किया, अब तक कोई जानकारी नहीं
देवरीखुर्द निवासी दुर्गा शर्मा ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में बताया कि उनके पति सुब्रिती शर्मा (37) को अगस्त 2025 में पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक बताते हुए डिपोर्ट कर दिया था। उनका कहना है कि पति न तो बांग्लादेश पहुंचे और न ही परिवार से उनका कोई संपर्क हो पाया है। अब तक उनके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अदिति सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि दोनों का विवाह करीब 15 वर्ष पहले हुआ था और सुब्रिती शर्मा लंबे समय से भारत में रह रहे थे। उनके पास भारतीय नागरिकता से जुड़े वैध दस्तावेज भी मौजूद हैं।
हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने एक सप्ताह का अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट किया कि इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा।
वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश दस्तावेजों पर कोर्ट ने कहा कि इन्हें केवल कवरिंग मेमो के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के विधिवत शपथपत्र के साथ रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जाए। इसके लिए भी एक सप्ताह का समय दिया गया है।
दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने हलफनामे की प्रति याचिकाकर्ता को भी उपलब्ध कराएं, ताकि वह अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रख सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है। फिलहाल अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है, जबकि याचिकाकर्ता अपने पति का पता लगाए जाने और उन्हें सुरक्षित प्रस्तुत किए जाने की मांग पर कायम है।