Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है कि यदि नियुक्ति या नियमितीकरण में कोई प्रक्रियागत त्रुटि नियोक्ता की ओर से हुई है, तो उसकी सजा वर्षों तक ईमानदारी से सेवा देने वाले कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CCOST) की रिट अपील खारिज करते हुए दो कर्मचारियों की सेवा बहाली के सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा।
2014 में नियमित हुए, 2020 में कर दी गई थी सेवा समाप्त
मामला रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CCOST) में कार्यरत भृत्य आर्यहिंद यादव और भोजेश्वर चंद्राकर से जुड़ा है। दोनों की नियुक्ति वर्ष 2011-12 में कलेक्टर दर पर हुई थी। वर्ष 2014 में विभाग ने उन्हें नियमित वेतनमान पर नियमित कर दिया। इसके बाद दोनों कर्मचारियों ने कई वर्षों तक सेवाएं दीं।
सितंबर 2020 में परिषद ने यह कहते हुए दोनों की सेवाएं समाप्त कर दीं कि नियमितीकरण भर्ती नियमों के अनुरूप नहीं था। कर्मचारियों ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां सिंगल बेंच ने उनकी बर्खास्तगी को अवैध बताते हुए सेवा बहाल करने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट ने कहा- विभागीय जांच के बिना बर्खास्तगी असंवैधानिक
परिषद ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की। परिषद का तर्क था कि नियमितीकरण सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना हुआ था, इसलिए कर्मचारियों की नियुक्ति वैध नहीं थी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि नियमितीकरण के बाद निर्धारित अवधि में प्रोबेशन बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। ऐसे में कानूनन यह माना जाएगा कि कर्मचारियों ने परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी कर ली और वे नियमित कर्मचारी बन गए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमित कर्मचारी को सेवा से हटाने से पहले संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत पूर्ण विभागीय जांच करना अनिवार्य है। केवल कारण बताओ नोटिस देकर या स्पष्टीकरण मांगकर सेवा समाप्त नहीं की जा सकती।
नियोक्ता की गलती का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगतेगा
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि कर्मचारियों पर नियुक्ति पाने के लिए किसी प्रकार की धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देने का आरोप नहीं है। यदि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई कमी रही भी हो, तो वह नियोक्ता की जिम्मेदारी है, उसका दंड वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को नहीं दिया जा सकता। डिवीजन बेंच ने इसी आधार पर CCOST की दोनों रिट अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के सेवा बहाली संबंधी आदेश को बरकरार रखा।