CG News: बिलासपुर। बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब जनसमस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया मंच राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो मामला और गंभीर हो सकता था। जिले के सभी विकासखंडों में इन दिनों सुशासन तिहार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी अलग-अलग स्थानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। बिल्हा में चल रहे कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंडी अध्यक्ष और विधानसभा टिकट के दावेदार रहे राजेंद्र शुक्ला अचानक कार्यक्रम स्थल पहुंच गए और मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने अधिकारियों से माइक मांगा, जिसे जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें दे दिया गया। लेकिन माइक हाथ में आते ही उन्होंने जो बातें शुरू कीं, उससे माहौल गर्मा गया।
राजेंद्र शुक्ला ने मंच से किसानों की समस्याएं सुनना शुरू कर दिया। उन्होंने खुले तौर पर यह भी कह दिया कि सुशासन तिहार में लोगों के काम नहीं हो रहे हैं। इसके बाद वे मौके पर मौजूद अधिकारियों को बुलाकर किसानों की शिकायतों का कारण पूछने लगे। देखते ही देखते कार्यक्रम का माहौल प्रशासनिक मंच से राजनीतिक बहस में बदल गया। अधिकारी भी स्थिति संभालने में असहज नजर आए। इसी बीच बिल्हा विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक भी वहां पहुंच गए।
टकराव बढ़ा, बड़ा विवाद होते-होते टला
धरमलाल कौशिक ने जब राजेंद्र शुक्ला को मंच से इस तरह बोलते देखा तो उन्होंने नाराजगी जताई। कौशिक ने कहा कि इस तरह मंच का उपयोग करना उचित नहीं है और बिना अधिकार इस तरह माइक से बयानबाजी नहीं की जा सकती। गौरतलब है कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में धरमलाल कौशिक को आमंत्रित किया गया था। मौके पर कांग्रेस नेता की बयानबाजी पर उन्होंने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके जवाब में राजेंद्र शुक्ला भी मुखर हो गए और दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इसी दौरान कार्यक्रम में मौजूद कुछ किसानों ने भी राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी। माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बहस के दौरान दोनों नेता आमने-सामने आ गए और इसी दौरान राजेंद्र शुक्ला ने धरमलाल कौशिक का हाथ पकड़ लिया। इससे माहौल और बिगड़ता दिखा, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस और कार्यकर्ताओं ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया।
नारेबाजी के बीच कार्यक्रम से लौटे समर्थक
बताया जा रहा है कि घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की भीड़ राजेंद्र शुक्ला और उनके समर्थकों के खिलाफ खड़ी नजर आई। इसके बाद राजेंद्र शुक्ला अपने समर्थकों के साथ सुशासन तिहार के विरोध में नारेबाजी करते हुए वहां से निकल गए। इस पूरे घटनाक्रम की जिलेभर में चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि जिले में पहली बार किसी कांग्रेसी नेता ने सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान इस तरह विरोध दर्ज कराया है, जिससे प्रशासनिक अमले की चिंता भी बढ़ गई है। इससे पहले सूरजपुर जिले में भी सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए काले झंडे दिखाए थे। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बिलासपुर दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग अब सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करने में जुट गया है।