Civil India News App Download
📢 Advertise With Us

Bilaspur High Court: एट्रोसिटी केस में विशेष अदालत की सजा पर रोक, तीनों याचिकाकर्ताओं को जमानत पर रिहाई का आदेश

Share on

Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापुर के तीन याचिकाकर्ताओं ने विशेष एट्रोसिटी न्यायालय द्वारा सुनाए गए दोषसिद्धि आदेश और सजा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग के तहत याचिका प्रस्तुत की थी। मामले को गंभीर मानते हुए वेकेशन कोर्ट ने इस पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने विशेष न्यायालय द्वारा दी गई सजा पर रोक लगा दी है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तीनों अपीलकर्ताओं को शर्तों के साथ रिहा करने का निर्देश दिया। अदालत ने प्रत्येक याचिकाकर्ता को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर राहत दी है। साथ ही निचली अदालत द्वारा निर्धारित अन्य शर्तों का पालन करने का भी निर्देश दिया गया है। हाई कोर्ट ने रजिस्ट्री को यह भी निर्देशित किया है कि शिकायतकर्ता और पीड़ित पक्ष को नोटिस जारी कर अपील लंबित होने की जानकारी दी जाए, ताकि वे स्वयं, अपने अधिवक्ता या संबंधित डीएलएसए की मदद से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित हो सकें।

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

जानिए क्या है पूरा मामला?

विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, जिला उत्तर बस्तर कांकेर ने 10 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में अपीलकर्ताओं को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत 500 रुपये जुर्माने सहित एक माह के कठोर कारावास तथा जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त 10 दिन की सजा सुनाई थी। इसके अलावा धारा 323 के तहत 1000 रुपये के अर्थदंड के साथ तीन माह का कठोर कारावास भी दिया गया था। अदालत ने दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया था।

विशेष अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

भानुप्रतापुर निवासी मुस्कान मोटवानी पत्नी सूरज मोटवानी, अनिल वाधवानी पिता राजकुमार वाधवानी और सरन यादव पिता परसराम यादव ने अपने अधिवक्ता विकास पटेल के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर विशेष अदालत के फैसले को चुनौती दी और सजा स्थगित करने की मांग की। मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विकास पटेल ने अदालत को बताया कि ट्रायल के दौरान सभी अपीलकर्ता जमानत पर थे और उन्हें अधिकतम तीन माह की सजा सुनाई गई है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अपीलकर्ताओं को सजा के बाद अपील दायर करने के उद्देश्य से जमानत दी गई थी और वे अपनी अधिकांश सजा पूरी कर चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अपील के अंतिम निराकरण में समय लग सकता है तथा प्रथम दृष्टया मामला अपीलकर्ताओं के पक्ष में मजबूत है। इसलिए मूल सजा को निलंबित किया जाना उचित होगा।

वहीं राज्य शासन की ओर से अधिवक्ता सुप्रिया उपासने ने याचिकाकर्ताओं के तर्कों का विरोध करते हुए विशेष अदालत के 10 अप्रैल 2026 के फैसले का समर्थन किया।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत की सजा पर लगाई रोक

मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस बीडी गुरु ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ताओं को सुनाई गई कम अवधि की सजा, ट्रायल के दौरान जमानत पर रहने और अपील के अंतिम निपटारे में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए यह मामला सजा निलंबित किए जाने योग्य है। अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई मूल कारावास की सजा को स्थगित कर दिया।

जमानतदार के साथ भरना होगा बांड, 8 जुलाई को रजिस्ट्री में होना होगा पेश

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अपीलकर्ताओं को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार की शर्त पर संबंधित निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सभी अपीलकर्ता 8 जुलाई 2026 को हाई कोर्ट रजिस्ट्री के समक्ष उपस्थित होंगे। इसके बाद रजिस्ट्री द्वारा तय तारीखों पर उन्हें संबंधित निचली अदालत में भी पेश होना होगा और अपील के अंतिम निपटारे तक प्रत्येक छह माह के अंतराल में अदालत के समक्ष उपस्थिति दर्ज करानी होगी।


Share on
Civil India News App Download
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!