GPF SCAM: बिलासपुर। व्याख्याता के वेतन से नियमित कटौती के बावजूद वह धनराशि उनके सीजीपीए खाते में न डाले जाने से नाराज व्याख्याता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने मामले की गहन सुनवाई करते हुए राज्य शासन को 30 जून तक अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।
पीएम श्री स्वामी आत्मानन्द विद्यालय मस्तूरी के व्याख्याता संजय पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि उनके वेतन से हर माह सीजीपीएफ की राशि काटी जा रही है, लेकिन वह रकम उनके सीजीपीए खाते में नियमित रूप से जमा नहीं हो रही है।याचिका के मुताबिक इस विषय में प्राचार्य टी संवर्ग जयप्रकाश ओझा को कई बार अभ्यावेदन सौंपे गए, लेकिन प्रिंसिपल ने न तो राशि दिलाई और न ही इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध कराई।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि कोषालय में चालान के माध्यम से जमा की गई राशि की जानकारी और चालान की प्रति मांगने पर भी प्राचार्य ने साफ इनकार कर दिया और उल्टे याचिकाकर्ता को ही उस पत्र व नियम की प्रति लाने को कह दिया, जिसके अंतर्गत सरकारी कर्मचारी को चालान की प्रति दिए जाने का प्रावधान है।
RTI के तहत मांगी जानकारी, तब भी रहे चुप
याचिकाकर्ता ने बताया कि सूचना के अधिकार के अंतर्गत आवेदन करने पर भी प्राचार्य ने गबन की गई राशि से जुड़ी कोई जानकारी साझा नहीं की। अपीलीय अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने प्राचार्य के इस व्यवहार को न केवल नजरअंदाज किया बल्कि उसे संरक्षण भी दिया।
याचिकाकर्ता व्याख्याता ने कलेक्टर, संयुक्त संचालक शिक्षा रामायण प्रसाद आदित्य और संचालक लोक शिक्षण संचनालय को अभ्यावेदन देकर गबन की गई राशि वापस दिलाने की मांग की। जब सक्षम अधिकारियों ने न कोई कार्रवाई की और न ही राशि उपलब्ध कराई, तब व्याख्याता संजय पांडेय ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया।
खुद ही उठाई अपने मामले की पैरवी की जिम्मेदारी
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता लेक्चरर ने कोर्ट में अपने मुकदमे की पैरवी स्वयं की। लेक्चरर याचिकाकर्ता पांडेय ने कोर्ट से मांग की कि वेतन से गबन की गई राशि देय तिथि तक का वास्तविक ब्याज सहित लौटाई जाए। याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ में हुई। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता लेक्चरर के वेतन से सीजीपीए की राशि काटी तो गई, लेकिन वह उनके सीजीपीएफ खाते में जमा नहीं हुई। कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की गई है। राज्य शासन व कलेक्टर बिलासपुर की ओर से अधिवक्ता सुयशधर बड़गैया ने पैरवी की।