Supreme Court: नाबालिग को भगाने के आरोपी की SLP पर सरकार को नोटिस

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SUPREME COURT NEWS: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपी जयकांत उर्फ लल्ला उर्फ लल्लन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

पढ़िए क्या है मामला?

आरोपी जयकांत उर्फ लल्ला उर्फ लल्लन पर आरोप है कि उसने 19 जुलाई 2025 को नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस जांच के दौरान पीड़िता को आरोपी के कब्जे से बरामद किया गया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। कोरबा जिले की दीपका पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 137(2), 87, 65(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 एवं 6 के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। कोर्ट के आदेश पर आरोपी न्यायिक रिमांड पर जेल में है।

आरोपी ने कहा- प्रेम प्रसंग और शादी का मामला

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी थी कि यह प्रेम प्रसंग का मामला है। आरोपी और पीड़िता ने आपस में शादी कर ली थी और दोनों पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि आरोपी 20 सितंबर 2025 से जेल में बंद है और निकट भविष्य में ट्रायल पूरा होने की संभावना नहीं है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।

पीड़िता और पिता ने किया विरोध

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीड़िता नाबालिग है और आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। मामले में 17 गवाह सूचीबद्ध हैं और अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके पिता भी कोर्ट में मौजूद थे और उन्होंने आरोपी को जमानत देने का विरोध किया था।

हाई कोर्ट ने जमानत देने से किया था इंकार

मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की सिंगल बेंच में हुई थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य, अपराध की गंभीरता और ट्रायल शुरू नहीं होने की स्थिति को देखते हुए आरोपी को इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।


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