Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था समाप्त करने की मांग से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कोरबा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड गठित कर विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही गर्भपात की अनुमति संबंधी याचिका पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पढ़िए क्या है मामला?
कोरबा जिले के बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र की रहने वाली दुष्कर्म पीड़िता ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर अनचाहे गर्भ को समाप्त करने की अनुमति मांगी है। याचिका में बताया गया है कि जब अपराध की शिकायत दर्ज कराई गई थी, उस समय पीड़िता लगभग 12 सप्ताह की गर्भवती थी। वर्तमान में गर्भावस्था करीब 15 सप्ताह की हो चुकी है। पीड़िता ने शपथपत्र प्रस्तुत कर कहा है कि वह बालिग है और अपनी इच्छा से गर्भसमापन कराना चाहती है।
हाई कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड गठित करने के दिए निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम, 1971 एवं संशोधित 2021 के प्रावधानों का हवाला दिया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए, जिसमें:
- स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist)
- बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician)
- रेडियोलॉजिस्ट/सोनोलॉजिस्ट
- अन्य आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सक
शामिल हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता की पहचान का सत्यापन एफआईआर के आधार पर किया जाए।
12 जून को मेडिकल बोर्ड के समक्ष होगी पेशी
हाई कोर्ट ने पीड़िता को 12 जून को दोपहर 2 बजे मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मेडिकल बोर्ड को पीड़िता का स्वास्थ्य परीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी और उसे सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
राज्य सरकार उठाएगी पूरा खर्च
कोर्ट ने आदेश दिया है कि पीड़िता के स्वास्थ्य परीक्षण, मेडिकल जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।मेडिकल बोर्ड को अपनी रिपोर्ट 15 जून तक हाई कोर्ट में जमा करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई भी 15 जून को निर्धारित की गई है।
मेडिकल बोर्ड से मांगी गई प्रमुख जानकारी
हाई कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को निम्न बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं:
- पीड़िता की वर्तमान शारीरिक स्थिति
- पीड़िता की मानसिक स्थिति
- गर्भावस्था की सटीक अवधि
- भ्रूण की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति
- गर्भपात की स्थिति में संभावित चिकित्सकीय जोखिम
- गर्भावस्था जारी रहने की स्थिति में स्वास्थ्य पर प्रभाव
- आवश्यक पैथोलॉजिकल एवं अन्य जांच रिपोर्ट
- चिकित्सकीय दृष्टि से गर्भसमापन की उपयुक्तता संबंधी राय
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल बोर्ड की विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय की जाएगी।