Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अस्थायी कर्मचारियों को भी मिलेगा पेंशन और रिटायरमेंट लाभ

Share on

Supreme Court News: नई दिल्ली। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस अरविंद कुमार मसीह की डिवीजन बेंच ने बिहार की एक विधवा महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अस्थायी कर्मचारियों को पेंशन देने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

पढ़िए क्या है मामला?

मामला बिहार की एक गरीब विधवा महिला से जुड़ा है। महिला के पति ने डाक विभाग में करीब 30 वर्षों तक अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम किया था। सेवा के दौरान नियमितीकरण नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु के बाद सरकार ने परिवार को पेंशन देने से इंकार कर दिया।

सरकार का कहना था कि मृत कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं थे, इसलिए उन्हें पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता। महिला ने पहले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी, लेकिन वहां राहत नहीं मिली। इसके बाद पटना हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:

“पेंशन कोई खैरात, अनुग्रह या भीख नहीं है, जिसे नियोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार दे या रोक दे। यह कर्मचारी का प्रवर्तनीय संवैधानिक अधिकार है।”

कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष सरकारी सेवा में देता है और पेंशन उसी सेवा का प्रतिफल है। इसे “स्थगित मजदूरी” की तरह माना जाना चाहिए।

सरकार को तीन महीने में भुगतान का आदेश

डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए संबंधित महिला को तीन महीने के भीतर पेंशन और बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

अस्थायी कर्मचारियों के लिए अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को देशभर में लंबे समय से कार्यरत अस्थायी, दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल “अस्थायी” शब्द का उपयोग कर कर्मचारियों को उनके वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।


Share on
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!